तो क्या टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा पाकिस्तान? PoK में भारत से मदद की गुहार, खैबर में सेना पर वार

अपने बुरे कर्मों का फल लगता है पाकिस्तान भुगतने वाला है। दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला आतंकी देश खुद कई मोर्चों पर एक साथ जूझ रहा है।

तो क्या टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा पाकिस्तान? PoK में भारत से मदद की गुहार, खैबर में सेना पर वार
Published By- Diwaker Mishra

मुजफ्फरबाद/जनमत न्यूज़। अपने बुरे कर्मों का फल लगता है पाकिस्तान भुगतने वाला है। दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला आतंकी देश खुद कई मोर्चों पर एक साथ जूझ रहा है।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर वैश्विक मंचों पर खुद को एक 'पॉवर ब्रोकर' और देश को निवेश के लिए सुरक्षित बताने में लगे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जुलाई 2026 तक आते-आते पाकिस्तान कई मोर्चों पर एक साथ सुलग रहा है।

एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बड़े पैमाने पर जन-विद्रोह भड़क उठा है, तो, दूसरी ओर बलूचिस्तान में विद्रोह अपने चरम पर है वहीं, खैबर पख्तूनख्वा (KP) में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

PoK में बगावत और खूनी संघर्ष

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में महंगाई, खाने का संकट और बुनियादी अधिकारों के हनन को लेकर अवाम का गुस्सा अब पूरी तरह बेकाबू हो चुका है। 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों ने स्थानीय सरकार की नींव हिला दी है।

8-9 जून 2026 को पुंछ जिले के रावलकोट और मुजफ्फराबाद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भीषण झड़पों में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई। पाकिस्तानी प्रशासन ने नागरिक अधिकार समूहों पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया है।

अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती कर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि कई जगह स्थानीय प्रदर्शनकारी खुलेआम भारत से हस्तक्षेप और मदद की गुहार लगाते देखे गए हैं।

बलूचिस्तान: इतिहास का सबसे घातक दौर

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और विद्रोहियों के बीच का संघर्ष अब सीधे युद्ध का रूप ले चुका है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले पहले से कहीं अधिक सटीक और बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। इस साल की शुरुआत में BLA ने बलूचिस्तान के मस्तुंग, ग्वादर, क्वेटा और नुश्की सहित 12 स्थानों पर एक साथ समन्वित हमले किए।

इनमें सुरक्षाबलों, थानों और जेलों को निशाना बनाया गया, जिसमें 70 से अधिक लोगों की मौत हुई और मस्तुंग जेल से 30 से अधिक कैदियों को छुड़ा लिया गया।

ताजा घटनाक्रम में, 3-4 जुलाई 2026 को BLA की 'मजीद ब्रिगेड' ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम ग्वादर जिले के जिवानी में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर एक बड़ा फिदायीन हमला किया। इस हमले में BLA ने 30 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया है।

TTP का आतंक: CRSS 2026 की चौंकाने वाली रिपोर्ट

आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान के लिए अब अपने ही पाले हुए आतंकी भस्मासुर साबित हो रहे हैं। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) द्वारा जारी 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) की हालिया रिपोर्ट आंतरिक सुरक्षा के ढहते ढांचे की भयावह तस्वीर पेश करती है।

क्षेत्र                           कुल मौतों में हिस्सेदारी                        मुख्य तथ्य

खैबर पख्तूनख्वा (KP)      61% (475 मौतें)            यहाँ मौतों के आंकड़े में सीधे 53% का भारी उछाल दर्ज किया गया है।

बलूचिस्तान                34% (265 मौतें)               BLA और अन्य विद्रोही समूहों के कारण यह दूसरा सबसे अशांत और घातक क्षेत्र बना हुआ है।

अप्रैल से जून 2026 के बीच पाकिस्तान में कुल 774 मौतें हुईं और 336 लोग घायल हुए।

इस दौरान हुए 65.2% हिंसक हमलों और 83.7% मौतों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से BLA और TTP ने ली है।

2026 में पहली बार TTP और बलूच अलगाववादियों द्वारा पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर ड्रोन हमलों और विस्फोटकों से लदे वाहनों का भारी इस्तेमाल दर्ज किया गया है, जिसने सेना की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

क्या नियंत्रण खो रही है पाकिस्तानी सेना?

एक ओर जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थिरता का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है दूसरी ओर, CRSS और अन्य सुरक्षा रिपोर्ट्स साफ इशारा कर रही हैं कि सेना के पास इन सुलगते मोर्चों को शांत करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है।

दोतरफा युद्ध (पश्चिमी सीमा पर TTP और दक्षिण-पश्चिम में बलूच विद्रोही) और PoK के अभूतपूर्व आंतरिक असंतोष ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को अब तक के सबसे गहरे संकट में धकेल दिया है।