श्रीराम मंदिर दान घोटाले पर बोले आचार्य प्रमोद कृष्णम- सिसायत कर रहा है विपक्ष, उनकी विश्वनीयता संदिग्ध
उप्र के संभल स्थित श्री कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम श्रीराम मंदिर दान घोटाले के मामले में सियासत पर विपक्ष पर भड़के। विपक्ष का श्रीराम मंदिर में श्रद्धा, आस्था और सनातन से किसी प्रकार का लेना देना नहीं है।
संभल से राम व्रेश यादव की रिपोर्ट
संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल स्थित श्री कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम श्रीराम मंदिर दान घोटाले के मामले में सियासत पर विपक्ष पर भड़के। विपक्ष का श्रीराम मंदिर में श्रद्धा, आस्था और सनातन से किसी प्रकार का लेना देना नहीं है।
विपक्ष सिर्फ पीएम मोदी को टारगेट कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए दान घोटाले के मामले में सिसायत कर रहा है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बयान देकर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में शामिल लोगों को विश्वनीयता पर सवाल उठाए।
ट्रस्ट में महत्वपूर्ण और विश्वसनीय लोग शामिल थे, लेकिन यह सभी लोग करोड़ों लोगों के भरोसे पर खरे नहीं उतरे। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्रस्ट में शामिल सभी लोगों से इस्तीफ़े देने और दान घोटाले की जांच CBI से कराए जाने की माँग की है।
कल्कि धाम के जगद्गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि विपक्ष का न तो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से कोई लेना-देना है, न ही उसकी श्रद्धा, आस्था या सनातन धर्म से कोई सरोकार है।
विपक्ष केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाना चाहता है और उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रहा है,उन्होंने कहा कि जिस भरोसे के साथ श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन किया गया था, ट्रस्ट उस भरोसे पर खरा नहीं उतर पाया।
हालांकि, ट्रस्ट के पदाधिकारियों की निष्ठा, श्रद्धा, आस्था और समर्पण पर वह कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा रहे हैं लेकिन इतना बड़ा मामला सामने आने के बावजूद यदि पदाधिकारी अपने पदों पर बने हुए हैं, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। इस्तीफा देने से वे दोषी सिद्ध नहीं हो जाएंगे, बल्कि इससे निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ होगा। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संदेह और गहरा होगा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले भी कभी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पक्ष में नहीं रहा। वह राम मंदिर के निर्माण का विरोध करता रहा और मंदिर बनने के बाद शिलान्यास से लेकर प्राण-प्रतिष्ठा तक हर चरण पर आपत्ति जताता रहा लेकिन अब कथित घोटाले के कारण विपक्ष को राजनीति करने का बड़ा अवसर मिल गया है।
आचार्य ने कहा कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और सम्मान का विषय है। यदि श्रीराम जन्मभूमि परिसर में किसी प्रकार का घोटाला हुआ है, तो उसकी जांच देश की सबसे सक्षम और निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता छोटी हो सकती है, लेकिन सनातन उससे बड़ा है। सनातन, धर्म और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा सर्वोपरि है। ट्रस्ट बनते और बदलते रहते हैं, लेकिन धर्म और लोगों का विश्वास बना रहना चाहिए।
टिन्नू यादव का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति के स्तर का मामला नहीं है। इसके पीछे बड़ी ताकतें हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि वह अकेले नहीं हैं, बल्कि करोड़ों हिंदू और सनातनी भी चाहते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। तभी विपक्ष को राजनीति करने का अवसर नहीं मिलेगा और सत्य देश के सामने आएगा।


