पीड़ित महिला को न्याय से वंचित, कागजों तक सीमित रह गईं सरकारी योजनाएं — प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल

सरकार नारी सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, 1090 महिला हेल्पलाइन, महिला हेल्प डेस्क जैसी योजनाओं का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

पीड़ित महिला को न्याय से वंचित, कागजों तक सीमित रह गईं सरकारी योजनाएं — प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट —

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज। जिले में एक पीड़ित महिला द्वारा दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और दुष्कर्म जैसे अत्यंत गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता और संवेदनहीनता को उजागर करता है। महिला पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लगा रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के चलते वह आज भी दर-दर भटकने को मजबूर है।

एक ओर सरकार नारी सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, 1090 महिला हेल्पलाइन, महिला हेल्प डेस्क जैसी योजनाओं का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। गंभीर और संवेदनशील मामलों में भी पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को अनसुना किया जाना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

पीड़िता का आरोप है कि उसने संबंधित थाने और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत, साक्ष्य और अपने बयान उपलब्ध कराए, लेकिन न तो मुकदमा दर्ज किया गया और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। महिला का यह भी कहना है कि न्याय दिलाने के बजाय उसे ही डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे उसका मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न और बढ़ गया है।

इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक शिक्षित और विवाहित महिला प्रशासन के दरवाजे खटखटाने के बाद भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है, तो आम और कमजोर वर्ग की महिलाओं को न्याय कैसे मिलेगा। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाएं और कानून तभी सार्थक सिद्ध होंगे, जब पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले में कब सक्रिय होता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।