गाजीपुर: अशोक और उनके बेटे सूरज की जाबांजी ने बचाई थी 12 जिंदगियाँ, सीएमएस राजेश सिंह ने दी आर्थिक मदद
उप्र के गाजीपुर जनपद में सन 2014 में सिकंदरपुर घाट पर एक हृदयस्पर्शी घटना ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया था। अशोक चौधरी और उनके 7 वर्षीय बेटे सूरज चौधरी ने बहादुरी का अनुपम उदाहरण पेश करते हुए 12 लोगों की जान बचाई थी।
गाजीपुर से अमितेश सिंह की रिपोर्ट
गाजीपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के गाजीपुर जनपद में सन 2014 में सिकंदरपुर घाट पर एक हृदयस्पर्शी घटना ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया था। अशोक चौधरी और उनके 7 वर्षीय बेटे सूरज चौधरी ने बहादुरी का अनुपम उदाहरण पेश करते हुए 12 लोगों की जान बचाई थी।
छोटा सा सूरज खुद अपनी जान की बाज़ी लगाकर 11 लोगों को पानी के भँवर से निकाल लाया था। पिता-पुत्र की इस साहसिकता ने हर किसी का मन छू लिया था।सूरज अब 12वीं की इम्तिहान पास कर ग्रेजुएशन करने की राह पर है। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए मदद के लिए लोग आगे आ रहे हैं।
इस घटना से गहराई से प्रभावित हुए सीएमएस राजेश सिंह ने सूरज की आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद का फैसला लिया है। बिना किसी दिखावे के वह पूरी सादगी के साथ अशोक चौधरी के घर पहुँचे।
सूरज के हाथों में उन्होंने कुछ पैसे देते हुए आर्थिक मदद की। एक प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर सिंह ने धनराशि बताने से मना किया, उन्होंने कहा कि वह अशोक चौधरी के परिजन को दी गयी आर्थिक मदद की रकम को सावर्जनिक नहीं करना चाहते है।
सूरज से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि बेटा, तुम्हारी बहादुरी ने प्रभावित किया। घटना के समय सिर्फ 7 साल की उम्र में तुमने अपनी जान दाँव पर लगाकर इतनी जिंदगियाँ बचाईं। तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल हो।
समाज के सच्चे नायकों को समय के साथ अक्सर भुला दिया जाता है, लेकिन उन्हें याद रखना औरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है। समाज के हर क्षेत्र में ऐसे लोग मौजूद हैं जो अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और लाभ को दरकिनार कर सामाजिक सेवा का बड़ा काम कर गुजरते हैं।
सूरज की सच्ची इंसानियत और साहस की कहानी कभी पुरानी नहीं पड़ेगी।इस दौरान अशोक के परिजन के साथ समाजसेवी उमेश श्रीवास्तव और मंटू राय मौजूद रहे।

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