चंदौली: डेढ़ माह तक बेटी को तलाशता रहा परिवार, हो चुकी थी मौत; पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

उप्र के चंदौली जनपद के अलीनगर थाना क्षेत्र से जुड़े एक युवती के लापता होने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।

चंदौली: डेढ़ माह तक बेटी को तलाशता रहा परिवार, हो चुकी थी मौत; पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
Published By- Diwaker Mishra

चंदौली से उमेश सिंह की रिपोर्ट

चंदौली/जनमत न्यूज़। उप्र के चंदौली जनपद के अलीनगर थाना क्षेत्र से जुड़े एक युवती के लापता होने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। करीब डेढ़ माह से अपनी बेटी की तलाश में भटक रहे परिजनों को हाल ही में पता चला कि उसकी मौत 8 अप्रैल को एक सड़क दुर्घटना में हो चुकी थी।

पहचान न हो पाने के कारण पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया था। घटना की जानकारी देर से मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बेटी की तलाश में भटकता रहा परिवार

मृतका के पिता प्रदीप कुमार ने बताया कि उनकी बेटी करीब डेढ़ से दो माह पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिवार लगातार उसकी तलाश में जुटा था और पुलिस से भी संपर्क बनाए हुए था। उनका आरोप है कि हाल ही में अलीनगर थाना प्रभारी ने उन्हें रामनगर थाने जाकर जानकारी लेने को कहा। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनकी बेटी की मौत काफी पहले सड़क दुर्घटना में हो चुकी है।

पहचान न होने पर कर दिया गया अंतिम संस्कार

पुलिस अभिलेखों के अनुसार युवती की मृत्यु ट्रक की चपेट में आने से हुई थी। दुर्घटना के बाद उसकी पहचान नहीं हो सकी, जिसके चलते पोस्टमार्टम के उपरांत उसका अंतिम संस्कार करा दिया गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें न तो हादसे की जानकारी दी गई और न ही अंतिम संस्कार के संबंध में सूचित किया गया, जिससे परिवार सदमे में है।

बहन ने लगाए गंभीर आरोप

मृतका की बहन दीप्ति ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बहन लंबे समय से प्रताड़ना झेल रही थी। उन्होंने दावा किया कि युवती अपने पीछे कुछ लिखित तथ्य भी छोड़ गई थी, जिनकी जांच की जानी चाहिए। दीप्ति का आरोप है कि परिवार पिछले डेढ़ माह से थानों के चक्कर काटता रहा, लेकिन उन्हें मामले की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ रखा गया।

जांच में नहीं मिला अपेक्षित सहयोग

परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। यदि समय रहते सूचना साझा की जाती तो परिवार को इतनी लंबी पीड़ा और अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें स्वयं अलग-अलग स्थानों पर जाकर जानकारी जुटानी पड़ी।

सभी पहलुओं से जांच की मांग

परिवार ने मांग की है कि मामले को केवल सड़क दुर्घटना मानकर बंद न किया जाए। मृतका के पति और ससुराल पक्ष से जुड़े लोगों से गहन पूछताछ की जाए तथा दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना या किसी अन्य प्रकार के दबाव की आशंका की भी निष्पक्ष जांच की जाए।

परिजनों का कहना है कि सच्चाई सामने आने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और परिजन प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।