जनपद में संचालित कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच तेज

तकनीशियन तकनीकी सहायता दे सकते हैं, लेकिन अंतिम रिपोर्ट पर हस्ताक्षर और उसकी कानूनी जिम्मेदारी केवल पात्र डॉक्टर की ही होती है। बिना योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक के जांच करना कानूनन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

जनपद में संचालित कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच तेज
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट —

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज। जनपद में संचालित कुछ अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार शहर के गोल चक्कर क्षेत्र स्थित शिफा अल्ट्रासाउंड का पंजीकरण तो कराया गया है, लेकिन वहां जांच करने वाले चिकित्सक की वैधानिक योग्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर पड़ताल शुरू कर दी गई है।

अल्ट्रासाउंड केंद्रों का संचालन Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act के तहत निर्धारित कड़े प्रावधानों के अनुरूप किया जाना अनिवार्य है। इस अधिनियम के अनुसार केंद्र पर योग्य रेडियोलॉजिस्ट (एमडी/डीएमआरडी) या विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त एवं पंजीकृत सोनोलॉजिस्ट की उपस्थिति आवश्यक होती है। संबंधित चिकित्सक का नाम केंद्र के पंजीकरण प्रमाणपत्र पर दर्ज होना चाहिए तथा अल्ट्रासाउंड मशीन संचालन के लिए डॉक्टर का अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण होना अनिवार्य है।

नियमों के अनुसार तकनीशियन तकनीकी सहायता दे सकते हैं, लेकिन अंतिम रिपोर्ट पर हस्ताक्षर और उसकी कानूनी जिम्मेदारी केवल पात्र डॉक्टर की ही होती है। बिना योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक के जांच करना कानूनन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

मामले में संबंधित अधिकारी डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि प्राप्त शिकायतों और सूचनाओं के आधार पर विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित केंद्र के विरुद्ध अधिनियम के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

PC-PNDT अधिनियम के उल्लंघन पर केंद्र का पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है। इसके साथ ही आर्थिक दंड और कारावास तक का प्रावधान है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनपद में किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र को नियमों के विपरीत संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।