मुजफ्फरनगर स्वास्थ्य विभाग पर बड़े सवाल, शपथ पत्र के बाद भी चल रहा निजामुद्दीन चैरिटेबल हॉस्पिटल
उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। मामला निजामुद्दीन चैरिटेबल हॉस्पिटल से जुड़ा है।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। मामला निजामुद्दीन चैरिटेबल हॉस्पिटल से जुड़ा है।
जहां 2 अप्रैल 2026 को डॉ. अब्दुल बारी द्वारा लिखित शपथ पत्र देकर स्पष्ट रूप से यह जानकारी दी गई थी कि वह अस्पताल में किसी भी प्रकार का चिकित्सीय कार्य नहीं करेंगे और अस्पताल से अपना नाम हटाने की मांग भी की गई थी।
शपथ पत्र में डॉ. अब्दुल बारी ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से अस्पताल में कार्य करना बंद कर दिया है तथा ऑनलाइन पोर्टल और अस्पताल से उनका नाम हटाया जाए।
इसके बावजूद सूत्रों के अनुसार अस्पताल परिसर में अब भी बोर्ड लगाकर अस्पताल का संचालन जारी है। आरोप है कि बिना रजिस्टर्ड डॉक्टर के गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, अस्पताल के बोर्ड पर आयुर्वेदिक डिग्री का भी उल्लेख बताया जा रहा है, जबकि सूत्रों का दावा है कि संबंधित दस्तावेज भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी जा चुकी है, तब आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सूत्रों के मुताबिक मामले की जानकारी संबंधित अधिकारी डॉ. अजय तक भी पहुंचाई गई, लेकिन कार्रवाई के बजाय अस्पताल का संचालन लगातार जारी बताया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग आखिर कब जागेगा? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? अगर समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी गंभीर घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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