उरई: भाड़े के ठेकेदारों के द्वारा अवैध खनन को दिया जा रहा बढ़ावा, वीआईपी जिले के माफिया के हवाले
उप्र के योगीराज में माफिया गोरखपुर जिले का निवासी होने का फायदा उठा रहा है। हमीरपुर जिले से मौरंग खंड चलाने का पट्टा स्वीकृत हुआ था जिसको उसी जिले से संचालित करने की अनुमति प्रशासन द्वारा दी जाती है।
उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट
उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के योगीराज में माफिया गोरखपुर जिले का निवासी होने का फायदा उठा रहा है। हमीरपुर जिले से मौरंग खंड चलाने का पट्टा स्वीकृत हुआ था जिसको उसी जिले से संचालित करने की अनुमति प्रशासन द्वारा दी जाती है।
हमीरपुर के जिटकरी इछौरा 25/21 निविदा में स्वीकृत हुआ था जिसको हमीरपुर की सीमा से चलाने की इजाजत दी गई थी लेकिन अधिक लाभ और ज्यादा क्षेत्र में खनन का लालच भाड़े के ठेकेदारों को गलत रास्ते में ले गया और जालौन जिले की मौरंग उठाने का मौका नहीं छोड़ा।
जब विभाग ने दवाब बनाया और रास्ते को बदलने के लिय कहा तो वीआईपी जिले का डर भाड़े के ठेकेदारों द्वारा दिया गया। श्रीवास्तव सर नेम वाले व्यक्ति के द्वारा वीआईपी के जिले का होने का भूत विभागीय अधिकारियों के अंदर समा गया है जिसको निकालना मुश्किल है ।
इछौरा जिटकरी मौरंग खंड को मैसर्स डीजियाना इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से है जो राजस्थान की बड़ी फर्म है इसको यह खंड स्वीकृत हुआ था लेकिन यह फर्म अवैध कार्य को अंजाम नहीं दे सकती थी।
इसलिए इसने कुछ ऐसे भाड़े के ठेकेदारों को तलाशा जो अवैध खनन में महारथ हासिल रखते हो ऐसा ही हुआ असली ठेकेदारों ने गोरखपुर के कुछ नामी गिरामी भाड़े के ठेकेदारों से संपर्क किया जो मुख्यमंत्री के जिले का होने का लाभ दिला सके वास्तविकता में ऐसा ही हुआ।
जब अवैध ठेकेदारों ने मौरंग खंड को अपने हाथों में लिया इसके बाद जालौन के रास्ते को तलाशने के लिए माफिया दौड़ा और रास्ता खोजने में सफल रहा यही नहीं जालौन की सीमा में मौरंग की उठान भाड़े के ठेकेदार कर रहा है।
अब अवैध ठेकेदारों को दो जिलों की मौरंग उठाने का लाभ सीधा मिल रहा है और सुगम रास्ता जालौन की सीमा से भी खोज लिया ट्रकों की निकासी जो हमीरपुर जिले की सीमा से होनी चाहिए वो जालौन की सीमा से हो रही है हालांकि जालौन जिले के राजस्व को क्षति हो रही है लेकिन गोरखपुर के ठेकेदारों से कोई कुछ कार्रवाई करने में अपने हाथ आगे करता नहीं दिखाई दे रहा।
खनिज विभाग में प्रत्येक जिले को अलग अलग राजस्व का लक्ष्य दिया जाता है उसके हिसाब से मौरंग के खंडों के निविदा जारी होती है इसमें शर्त होती है कि जिस जिले से खंड स्वीकृत होगा उसी जिले की सीमा से ट्रकों की निकासी की जाएगी। किसी दूसरे जिले से मौरंग खंड को संचालित नहीं कर सकते लेकिन सत्ता के नशे में चूर भाड़े के ठेकेदारों को कुछ भी नहीं दिख रहा।
जिला खनिज अधिकारी शनि कौशल से बात की तो उन्होंने कहा कि एक जिले से दूसरे जिले में जाने की रोक नहीं है लेकिन नदी की धारा के में व्यवधान के बिना उन्होंने कहा कि कच्चा पुल भी नदी के तल पर नहीं बनाया जा सकता यदि ऐसा किया जा रहा है तो जांच कराकर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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