उरई: कुईया झोर मजरे को संपर्क मार्ग से जोड़ने की पहल, डीएम ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

उप्र के उरई जनपद के ग्राम परासन के मजरे दूरस्थ मजरे कुईया झोर को संपर्क मार्ग से जोड़ने की दिशा में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए।

उरई: कुईया झोर मजरे को संपर्क मार्ग से जोड़ने की पहल, डीएम ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
Published By- Diwaker Mishra

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के उरई जनपद के ग्राम परासन के मजरे दूरस्थ मजरे कुईया झोर को संपर्क मार्ग से जोड़ने की दिशा में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में आ रही प्रत्येक बाधा का समाधान समन्वय के साथ किया जाए, ताकि ग्रामीणों को शीघ्र आवागमन की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि कुईया झोर, परासन ग्राम का मजरा है, जिसे परासन ग्राम संपर्क मार्ग से संतृप्त किया जाना प्रस्तावित है।

राठ-कालपी-मदारीपुर मार्ग (राज्यमार्ग संख्या-130) के किलोमीटर 34 से कुईया झोर तक जाने वाले संपर्क मार्ग की कुल लंबाई 2.20 किलोमीटर है, जो वर्तमान में कच्चा मार्ग है। प्रस्तावित मार्ग में चैनेज 0.300 से 1.000 किलोमीटर तक निजी काश्तकारों की भूमि आती है, जबकि चैनेज 1.000 से 1.800 किलोमीटर तक आरक्षित वन क्षेत्र स्थित है।

साथ ही राजस्व अभिलेखों में उक्त मजरा दर्ज न होने के कारण उसकी आबादी का विवरण उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना तथा नाबार्ड योजना के अंतर्गत 250 से अधिक आबादी वाली अनजुड़ी बसावटों को जोड़ने हेतु प्रस्ताव तैयार नहीं किया जा सका।

अधिशासी अभियंता ने यह भी अवगत कराया कि 26 जून 2024 को लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता एवं वन विभाग के वन दरोगा द्वारा प्रस्तावित संरेखण का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया था, जिसमें निजी कृषकों की भूमि एवं वन भूमि मार्ग निर्माण में बाधा के रूप में पाई गई तथा कोई वैकल्पिक संरेखण उपलब्ध नहीं था।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सड़क निर्माण के लिए आवश्यक वन भूमि के विनिमय की कार्यवाही नियमानुसार शीघ्र प्रारंभ की जाए। साथ ही निजी काश्तकारों से वार्ता कर सहमति के आधार पर समाधान निकाला जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन किसानों की भूमि सड़क निर्माण में प्रभावित हो रही है, उनके लिए भूमि के बदले उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क निर्माण जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है। वन भूमि एवं निजी भूमि से संबंधित औपचारिकताएं पूर्ण होते ही मार्ग निर्माण का रास्ता प्रशस्त होगा और कुईया झोर के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।