उरई का अमृत सरोवर राहिया: दो घूँट पानी को तरस गईं मछलियां, उप मुख्यमंत्री ने किया था लोकार्पण
उप्र के उरई जनपद में सितंबर 2022 को कितना शोर हुआ था। वाहवाही पर वाहवाही लूटने की होड़ थी। सरकारी पन्ने पर पन्ने भरे जाने लगे। ऐसा लगा मानो सरोवर में पानी की जगह कोई विशेष पानी होगा जिसे 'अमृत' की संज्ञा दी गई।
उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट
उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के उरई जनपद में सितंबर 2022 को कितना शोर हुआ था। वाहवाही पर वाहवाही लूटने की होड़ थी। सरकारी पन्ने पर पन्ने भरे जाने लगे। ऐसा लगा मानो सरोवर में पानी की जगह कोई विशेष पानी होगा जिसे 'अमृत' की संज्ञा दी गई। लापरवाही की हद ये है कि इस सरोवर के एक कोने में पानी बहुत अल्प मात्रा में शेष है।
तालाब में पली- बढ़ीं मछलियों को जीने के लिए पानी तक नसीब नहीं हुआ। कुछ खुद मर गईं और बाकी को यहां के लोग मार कर खा गए। जब शहर के किनारे बसे सरोवर का ये हाल है तो सुदूर के सरोवरों का क्या हाल होगा? इसे समझा जा सकता है।
सिर्फ नारे गढ़ लेने या प्रभावपूर्ण स्लोगन लिखने से प्रगति संभव नहीं है। इसके लिए धरातल पर काम होना बहुत आवश्यक है और यह कर्तव्यनिष्ठा के बगैर हरगिज संभव नहीं।
राहिया अब तो उरई शहर का ही एक हिस्सा है पर अभी इसे ग्राम पंचायत का दर्जा मिला हुआ है। शहर के मुख्य मार्ग के किनारे बसे राहिया का अमृत सरोवर तो ठीक सड़क किनारे ही है। इस सरोवर के लिए मानक से कहीं अधिक बजट खर्च हुआ।
अमृत अकेले नाम भर है या कोई चमत्कृत गुण? इसे विश्लेषित कौन करेगा? सरोवर में पलने वाले जीव जंतु उनमें भी खास तौर पर मछलियां तो दो घूँट पानी तक को तरस गईं। ग्रामीणों के कई कार्य इस पानी के भरोसे थे वे भी रुक गए।
तालाब काफी बड़ा है। जब पानी से भरा था, तब इस ओर हर कोई निहार लेता था। अप्रैल के बाद से ही पानी कम होने लगा। जून में तलहटी तक सूख गई। अब एक हिस्से में इतना कम पानी बचा है कि वह कीचड़ का रूप ले चुका है।
यदि गर्मी पड़ी तो दो-तीन दिन में ये हिस्सा भी सूख चुके बाकी हिस्से के रूप में अपना रूप मिला लेगा। फिर तो प्रकृति का ही सहारा होगा। बारिश होगी। तालाब भरकर मुस्कुराएगा और मछलियों सहित अन्य जीव जंतु फिर से इस ओर लौटेंगे।
उधर सरकारी विभाग के कागजों में पहले से ही इबारत लिख ली जायेगी कि "तालाब लबालब करा लिया गया।" कहो, लिख भी लिया गया हो कि सभी अमृत सरोवर भरे हैं। पशु-पक्षी सहित अन्य जीव-जंतु अमृत पान कर रहे हैं।
24 सितंबर 2022 को प्रदेश के उप मुख्य मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, मुख्यालय विधायक गौरी शंकर वर्मा, तत्कालीन जिलाधिकारी चांदनी सिंह, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव के अलावा ग्राम विकास अधिकारी राम विहारी वर्मा,
खंड विकास अधिकारी डकोर-बृजकिशोर कुशवाहा, उपायुक्त श्रम रोजगार अवधेश सिंह तथा ग्राम प्रधान सरला देवी की उपस्थिति में लोकार्पण किया था। इस दौरान पूजन हुआ। तालियाँ बजीं। तमाम सब्जबाग दिखाये गए।
अब हकीकत खुद ही देख लीजिए। सरकारी कागज कुछ भी कह रहे हों पर ये फोटो वास्तविकता की गवाही दे रहा है। ऐसा नहीं कि जिम्मेदार लोगों को ये दिखता न हो। देखकर भी देखना नहीं चाहा।
सूखे सरोवर के लिए किसकी जिम्मेदारी मानी जाए? प्रधान को या तो फुर्सत नहीं या फिर इसकी आवाज नहीं उठाई गई। अधिकारी, मंत्री या जनप्रतिनिधियों का ये दायित्व नहीं कि वे सूखे तालाबों के देखें।

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