बलरामपुर जनपद की राजनीति में मची हलचल

इस्तीफे को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में मृगेंद्र उपाध्याय ने केंद्र सरकार द्वारा जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और कुंभ (माघ) मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार को अपने फैसले की प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और संत समाज के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बलरामपुर जनपद की राजनीति में  मची हलचल
Reported By :- Gulam Nabi , Published By - ANKUSH PAL

बलरामपुर (जनमत) :- यूपी के बलरामपुर जनपद की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल मच गई, जब भारतीय जनता पार्टी से पिछले 25 वर्षों से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मृगेंद्र उपाध्याय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपना इस्तीफा सौंपा है। मृगेंद्र उपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा कि अब यदि भाजपा उनके घर आकर भी विधानसभा चुनाव का टिकट देगी, तब भी वे पार्टी में दोबारा नहीं जाएंगे।
मृगेंद्र उपाध्याय का परिवार जनसंघ काल से ही भाजपा और संघ परिवार से जुड़ा रहा है। वे स्वयं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला संयोजक, हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिला संयोजक, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विस्तारक रह चुके हैं। वर्तमान में वे भाजपा के सक्रिय सदस्य थे और 291 विधानसभा तुलसीपुर से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा कई बार जता चुके थे।


इस्तीफे को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में मृगेंद्र उपाध्याय ने केंद्र सरकार द्वारा जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और कुंभ (माघ) मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार को अपने फैसले की प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और संत समाज के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रदेश अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में मृगेंद्र उपाध्याय ने लिखा है कि कुंभ मेला के दौरान साधु-संतों, बटुकों और वृद्धजनों के साथ मेला प्रशासन द्वारा लात-घूंसे और जूतों से मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा है।
पत्र में मृगेंद्र उपाध्याय ने यह भी उल्लेख किया है कि शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित धर्मगुरु के साथ हुए अपमान से न केवल वे व्यक्तिगत रूप से आहत हैं, बल्कि इससे पूरे सनातन समाज की भावना आहत हुई है। उन्होंने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि इस पूरे घटनाक्रम में कहीं न कहीं सरकार की भूमिका संदिग्ध रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान मृगेंद्र उपाध्याय ने दो टूक कहा, “मैं भाजपा से केवल चुनाव या टिकट के लिए नहीं जुड़ा था। मैंने संगठन और विचारधारा के लिए 25 वर्षों तक काम किया। लेकिन जिस तरह शंकराचार्य और संत समाज के साथ व्यवहार किया गया, वह असहनीय है। अब भाजपा चाहे भविष्य में कोई भी पद या टिकट दे, मैं उसे ठुकरा दूंगा।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि उनके साथ उनकी पूरी टीम भी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही है। मृगेंद्र उपाध्याय के इस फैसले को लेकर जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ता का इस तरह पार्टी छोड़ना आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।