बलरामपुर: MDM योजना में गबन मामले में तीन और अभियुक्त धराए, पूर्व में हो चुकी है 9 की गिरफ्तारी
बलरामपुर पुलिस द्वारा थाना कोतवाली नगर क्षेत्रान्तर्गत मध्यान्ह भोजन योजना का ग्यारह करोड़ से अधिक सरकारी धन का गबन करने की घटना के संबंध में तीन और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।
बलरामपुर से गुलाम नबी कुरैशी की रिपोर्ट
बलरामपुर/जनमत न्यूज़। यूपी की बलरामपुर पुलिस द्वारा थाना कोतवाली नगर क्षेत्रान्तर्गत सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना कर मध्यान्ह भोजन योजना का ग्यारह करोड़ से अधिक सरकारी धन का गबन करने की घटना के संबंध में अभियोग पंजीकृत कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी के क्रम में तीन और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।
गौरतलब है कि 26 नवंबर 2025 को बलरामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला की तहरीर पर ग्यारह करोड़ से अधिक सरकारी धन का गबन करने के सम्बन्ध में डीसी एमडीएम फिरोज अहमद खान सहित अन्य लोगों पर अभियोग पंजीकृत कराया गया था. इस मामले में फिरोज अहमद खान सहित 9 लोगों को पूर्व में गिफ्तार किया जा चुका है।
इसी क्रम में 14 जनवरी 2026 को मुखबिर खास की सूचना पर 3 अभियुक्तों वकील अहमद नूरी, मोहम्मद मुख्तार व मोहम्मद नजीर पुत्र रहमतुल्ला को विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किया गया है।
अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया की हम लोग फिरोज अहमद खां जिला समन्वयक, मध्यान्ह भोजन योजना (डीसी एनडीएम) बलरामपुर के साथ मिलकर बेसिक शिक्षा विभाग के आईवीआरएस पोर्टल से विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या को ज्ञात करके छात्रों की संख्या के सापेक्ष शासन द्वारा निर्धारित कन्वर्जन कास्ट के गुणान्क में धनराशि की गणना कर एक्सल सीट तैयार की जाती थी तथा बीएसए से अग्रसारित कराकर वित्त लेखा अधिकारी बेसिक शिक्षा से परीक्षित कराकर स्वीकृति हेतु जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाती थी।
एक्सल सीट को जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित कर दिये जाने के उपरान्त उस एक्सल सीट को पीएफएमएस पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता था, ताकि एक्सल सीट पर अंकित धनराशि विद्यालयों के खाते में पहुँच जाय।
इस स्तर पर मूल एक्सल सीट को अपलोड न करके अपने सहयोगी विद्यालयों के खातों में अंकित धनराशि को बढ़ाकर उसी बढ़ायी हुयी धनराशि के सापेक्ष धनराशि अन्य विद्यालयों के खातों से कम कर दी जाती थी, जिससे जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित धनराशि में कोई अंतर नहीं आता था।
इस प्रकार कूट रचना के फलस्वरूप जिन विद्यालयों में धनराशि बढ़ाकर भेजी जाती थी, उन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान व अभिभावक समिति के अध्यक्ष द्वारा धनराशि को निकालकर आपस में बांट लिया जाता था।

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