नौतपा के पहले ही तपा बुंदेलखंड, बांदा 48 पार जालौन 47 डिग्री के करीब; पर्यावरणविद संजय सिंह ने बताया कारण

उप्र के बुंदेलखंड की धरती सूर्य की तपिश से त्राहिमाम कर रही है यहां के सभी सातों जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार हो चुका है।

नौतपा के पहले ही तपा बुंदेलखंड, बांदा 48 पार जालौन 47 डिग्री के करीब; पर्यावरणविद संजय सिंह ने बताया कारण
Published By- Diwaker Mishra

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के बुंदेलखंड की धरती सूर्य की तपिश से त्राहिमाम कर रही है यहां के सभी सातों जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार हो चुका है। जिसमें बांदा ने रिकॉर्ड 49 डिग्री के करीब पहुंचकर देश का सबसे गर्म नगर बना वहीं जालौन भी पीछे नहीं रहा। यहां भी तापमान 47 के करीब पहुंच चुका है।

मौसम विभाग के मुताबिक अभी गर्मी से राहत की उम्मीद नहीं है। नौतपा के पहले ही सूर्य की किरणों की आग बुंदेलखंड को जलाने का काम कर रही है सुबह 11 बजे से ही सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दे रहा है।

जिला प्रशासन ने भी एडवाइजरी जारी हर लोगो से अपील की है कि यदि बहुत ही जरूरी कार्य हो तो ही घर से निकले नहीं तो घर के अंदर ही रहे हीट बेव का भी एलर्ट लगातार जारी हो रहा है।

यहीं नहीं बढ़ते तापमान से धरती के पानी का जलस्तर में भी बढ़ी गिरावट दर्ज की गई कई इलाकों में 20 फुट तक पानी का स्त्रोत नीचे चले गए है।

हालांकि प्रशासन उन सभी स्थानों पर पानी का बंदोबस्त दुरुस्त कराते हुए ग्रामीणों को राहत देने का कार्य कर रहा है। मवेशियों के पानी की किल्लत 15 दिन तो बहुत ज्यादा हुई लेकिन हाल ही ने नहरों का संचालन करा दिया गया जिससे आवारा पशुओं को पीने का पानी आसानी से मिल जाएगा ।

पर्यावरण और पानी पर काम कर रहे परमार्थ समाजसेवी संस्था के सचिव संजय सिंह से बात हुई तो उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड में बढ़ते तापमान की मुख्य वजह अत्यधिक खनन है। बांदा से मौरंग के साथ बड़े पैमाने पर पत्थरों की पहाड़ी की खत्म किया जा रहा है यहां पहाड़ी को खोदने के लिए डायनामाइट का प्रयोग हो रहा है, जो पृथ्वी के लिए बहुत हानिकारक है।

ललितपुर और झांसी में भी यही हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी रफ्तार से धरती को खोखला करते रहे तो एक दिन वह आएगा कि बुंदेलखंड में पानी के लिए जंग होगी बूंदबूंद पानी के लिए लोग परेशान होंगे।

उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई कि बुंदेलखंड में गर्मी चंदेलकाल से ही पड़ रही है। उस समय गर्मी से बचाव के लिए बड़े बड़े तालाबों को बनवाया गया है जो गर्मी को कम करने का काम करते थे इसके अलावा पहाड़ अधिक मात्रा में थे जो सूर्य की तपिश को सबसे अधिक समाहित करते है।

साथ ही नदी भी सूर्य की गर्मी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है लेकिन दुर्भाग्य है कि अर्थ के लालसा ने पहाड़ और नदी को समाप्त करने का मन बना लिया है इसमें सरकार भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि सरकार को उन सभी जल स्रोतों को फिर से जीवित करना होगा जो विलुप्त हो चुके है यही नहीं नए जलस्रोत तैयार भी करें तभी  बढ़ते तापमान का हम रोक सकेंगे इसके साथ साथ पौधा अधिक से अधिक लगाए साथ ही उन सभी को पेड़ बनाने का संकल्प भी लें ।