दागी अफसर को मिली CM के चहेते विभाग में तैनाती, सरकार या सनातन किसकी होगी किरकिरी?
सनातन का दम्भ भरने वाली भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में अधिकारी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा खींची गई लकीर को भी पार करने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने ऐसा ही एक कारनामा किया है।
स्पेशल रिपोर्ट रजनीश छवि
लखनऊ/जनमत न्यूज़। सनातन का दम्भ भरने वाली भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में अधिकारी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा खींची गई लकीर को भी पार करने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने ऐसा ही एक कारनामा किया है।
15 वर्षों तक आवास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण, नगर विकास विभाग में अपनी हुकूमत चलाने वाले मोहम्मद वासिफ को मात्र 10 माह में ही उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग से पर्यटन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में तैनाती दी गई है। यह तैनाती उपसचिव के पद पर दी गई है, जबकि पर्यटन विभाग में पहले से ही उपसचिव के पद पर चंदन रावत तैनात हैं।
बता दें कि इससे पहले मोहम्मद वासिफ नगर विकास विभाग में तैनात थे, जहां से उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में हटाया गया था। विदित हो कि नगर विकास विभाग ऐसा विभाग है जहां प्रदेश के नगरों के विकास हेतु बड़ा बजट आवंटित किया जाता है।
मोहम्मद वासिफ नगर विकास विभाग के बजट सेक्शन को वर्षों तक देखते रहे हैं जहां से उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में मुख्यमंत्री के आदेश पर हटाया गया था। अब ऐसे दागी अफसर को पर्यटन विभाग जैसे एक और बड़े बजट वाले विभाग में भेजा जा रहा है।
देखने वाली बात यह है कि जब इस चुनावी वर्ष में सरकार पर्यटन विभाग के जरिए धार्मिक पर्यटन स्थलों का विकास कर जनता को अपने पक्ष में करना चाहती है और इसके लिए भारी भरकम बजट भी खर्च करने को तैयार है।
ऐसे में एक ऐसे अफसर की तैनाती जिस पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हों कहाँ तक जायज हैं? यहां यह भी सवाल उठता है कि सनातन के धार्मिक पर्यटन स्थलों की समझ उक्त अफसर को कितनी हो सकती है?
यहां यह भी बताना समीचीन है कि उस समय नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात थे जिनके मोहम्मद वासिफ खासमखास बताए जाते हैं।
सवाल यह है कि ऐसे दागी अफसर को पर्यटन विभाग में उपसचिव जैसी महत्वपूर्ण तैनाती किस योग्यता के कारण दी गई है, यह समझ से परे है। फिलहाल अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात अपने चहेते मोहम्मद वासिफ को अपने विभाग में तैनात करने में सफल रहे हैं।
अब देखना यह है कि जब यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचती है तो सनातन का दम्भ भरने वाले इस पार्टी के मुखिया इसमें क्या हस्तक्षेप करते हैं? क्या इन्हें नियम विरुद्ध तैनाती देने में सरकार की किरकिरी कराने वाले अफसर पर कोई कार्यवाही होगी?


