यूपी भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत: 2027 चुनाव से पहले 40% विधायकों के टिकट पर संकट, संगठन ने तय किए नए मानदंड
लखनऊ/जनमत न्यूज़ । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी संगठन बड़े स्तर पर उम्मीदवारों के चयन की रणनीति पर काम कर रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी चुनाव में केवल मजबूत और जीत सुनिश्चित करने वाले चेहरों पर ही दांव लगाया जाएगा। ऐसे में कमजोर प्रदर्शन, नकारात्मक छवि और संगठन से दूरी बनाए रखने वाले कई मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में लखनऊ प्रवास के दौरान सरकार, संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेताओं को संदेश दिया कि यदि किसी का टिकट नहीं भी मिलता है तो उसे पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम करना होगा और संगठन को मजबूत बनाना होगा।
240 विधानसभा सीटों की विशेष समीक्षा
राष्ट्रीय अध्यक्ष का फोकस उन लगभग 240 विधानसभा क्षेत्रों पर रहा, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में विधायकों के प्रदर्शन का विस्तृत आकलन किया गया है और इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की रणनीति तैयार की जा रही है।
टिकट वितरण के लिए छह प्रमुख मानक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों के चयन में छह महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी जाएगी—
- सांसद और विधायक के बीच समन्वय की स्थिति।
- कार्यकर्ताओं के बीच विधायक की स्वीकार्यता।
- क्षेत्र में जनसंपर्क और सक्रियता।
- 70 वर्ष से अधिक आयु वाले विधायकों का मूल्यांकन।
- संगठन या सरकार के खिलाफ सार्वजनिक बयान देने वाले नेताओं का रिकॉर्ड।
- लोकसभा चुनाव में संबंधित विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रदर्शन का विश्लेषण।
इसके अलावा, जिन विधायकों ने 2022 विधानसभा चुनाव बेहद कम अंतर से जीता था, उनके प्रदर्शन की भी अलग से समीक्षा की जा रही है।
पहले भी बदले गए थे बड़ी संख्या में प्रत्याशी
भाजपा इससे पहले भी चुनावी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में उम्मीदवार बदलती रही है।
- 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अपने लगभग 32 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदले थे।
- 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पिछली बार हारी हुई अधिकांश सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे थे।
एमएलसी चुनाव में भी नए चेहरों पर जोर
शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद (MLC) सीटों के चुनाव को लेकर भी भाजपा रणनीति बना रही है। पार्टी ने कुछ सीटों पर पुराने विजेता उम्मीदवारों को दोबारा मौका दिया है, जबकि कई सीटों पर नए चेहरों को उतारने पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन सीटों पर पिछली बार भाजपा को सफलता नहीं मिली थी, वहां संगठन जीत की संभावना वाले उम्मीदवारों की तलाश में है।
संगठन ने चिन्हित कीं तीन प्रमुख चुनौतियां
बैठकों के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन के सामने तीन महत्वपूर्ण मुद्दे भी रखे—
1. मतदाता सूची की समीक्षा
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटने पर चिंता व्यक्त की गई। नेताओं से कहा गया कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जाए।
2. संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी से बचने की सलाह
राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे मामलों पर सार्वजनिक बयान देने से बचने की हिदायत दी गई। पार्टी का मानना है कि ऐसे विषयों पर अनावश्यक टिप्पणियां विपक्ष को राजनीतिक अवसर दे सकती हैं।
3. UGC नियमों पर संतुलित समाधान की जरूरत
बैठकों में यह भी चर्चा हुई कि नए UGC नियमों को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष है। पार्टी इस विषय पर व्यापक और स्थायी समाधान तलाशने के पक्ष में है।
संगठनात्मक समन्वय मजबूत करने पर जोर
हाल ही में गठित भाजपा प्रदेश संगठन की नई टीम के साथ हुई बैठक में समन्वय की कमी पर भी चर्चा हुई। संगठन महामंत्री ने सभी पदाधिकारियों से विधानसभा चुनाव से पहले आपसी तालमेल मजबूत करने और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने का आह्वान किया।
बैठक में प्रदेश संगठन से यह भी पूछा गया कि 2027 विधानसभा चुनाव में दोबारा पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं और किन क्षेत्रों में रणनीति को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
पंचायत चुनाव और उपचुनाव को लेकर रणनीति
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी विचार सामने आया कि उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाएं। साथ ही कुछ प्रस्तावित विधानसभा उपचुनाव भी मुख्य चुनाव के साथ कराने पर संगठन स्तर पर चर्चा हुई, ताकि पूरा ध्यान 2027 विधानसभा चुनाव पर केंद्रित रखा जा सके।


