मुख्यमंत्री के बयान पर कश्यप समाज में नाराज़गी, प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर माफी की मांग
सृष्टि रचयिता भगवान महर्षि कश्यप के पुत्र चक्रवर्ती राजा हिरण्यकश्यप को आतंकवादी, उग्रवादी, माफिया और गुंडा जैसे शब्दों से संबोधित किया जाना पूरे कश्यप समाज का अपमान है।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट —
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के एक कथित बयान को लेकर कश्यप समाज में नाराज़गी देखने को मिल रही है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस बयान को आपत्तिजनक बताते हुए भारत सरकार के प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। समाज के लोगों का कहना है कि उक्त बयान से कश्यप समाज की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं।
कश्यप समाज के पदाधिकारियों द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सृष्टि रचयिता भगवान महर्षि कश्यप के पुत्र चक्रवर्ती राजा हिरण्यकश्यप को आतंकवादी, उग्रवादी, माफिया और गुंडा जैसे शब्दों से संबोधित किया जाना पूरे कश्यप समाज का अपमान है। समाज का कहना है कि यह टिप्पणी उनके धार्मिक आस्था और इतिहास के प्रति असम्मानजनक है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि भगवान महर्षि कश्यप का विवाह दक्ष प्रजापति की 13 कन्याओं के साथ हुआ था और उनसे दो पुत्र हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष का जन्म हुआ। कश्यप समाज का दावा है कि हिरण्यकश्यप एक शक्तिशाली चक्रवर्ती और प्रजापालक राजा थे, जिनके शासनकाल में प्रजा सुखी और सुरक्षित थी। समाज के लोगों का कहना है कि उन्होंने बाहरी लोगों द्वारा फैलाए गए पाखंडवाद का विरोध किया था।
समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार 2 मार्च 2026 को गोरखपुर में आयोजित होलिका दहन कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान में हिरण्यकश्यप की तुलना आतंकवादी, उग्रवादी और माफिया से की गई थी। इस टिप्पणी के बाद कश्यप समाज के लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया।
कश्यप समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में मांग की है कि मुख्यमंत्री अपने इस बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द माफी नहीं मांगी गई तो देशभर में कश्यप समाज द्वारा व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन पर कश्यप समाज के कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने हस्ताक्षर करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और सरकार से इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है।


