बलरामपुर में गेहूं की आपूर्ति पर सवाल, बोरे भिगोकर वजन बढ़ाने का आरोप; 9 सेकेंड का वीडियो वायरल
उप्र के बलरामपुर जिले में एक 9 सेकेंड का वीडियो वायरल होने से सवाल खड़ा हो गया है।
बलरामपुर से गुलाम नबी कुरैशी की रिपोर्ट
बलरामपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के बलरामपुर जिले में एक 9 सेकेंड का वीडियो वायरल होने से सवाल खड़ा हो गया है। इस वीडियो से जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब और जरूरतमंदों तक पहुंचने वाले गेहूं की आपूर्ति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सदर विकास खंड के खुटेहना स्थित उप्र राज्य भंडार गृह में गेहूं के बोरे पानी से भिगोकर वजन बढ़ाने का आरोप सामने आया है। इस मामले से जुड़ा महज 9 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें टुल्लू पंप के जरिए गेहूं के बोरे भिगोते हुए दिखाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार बलरामपुर जनपद में हर महीने 15 लाख 96 हजार 130 लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रति व्यक्ति दो किलो गेहूं वितरित किया जाता है। इस हिसाब से प्रतिमाह लगभग 31 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी राशन दुकानों तक पहुंचता है।
इतनी बड़ी मात्रा में होने वाले वितरण में यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी होती है तो उसका सीधा असर गरीब लाभार्थियों के साथ-साथ राशन कोटेदारों पर भी पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य स्थिति में गोदामों में रखे गेहूं में नमी की मात्रा 8 से 12 प्रतिशत के बीच रहती है, लेकिन यदि बोरे में पानी डाला जाए तो यह नमी बढ़कर करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इससे एक बोरे का वजन औसतन तीन से चार किलो तक बढ़ जाता है। आरोप है कि इसी तरीके से वजन बढ़ाए गए बोरे ट्रकों में लादकर सरकारी राशन दुकानों तक भेज दिए जाते हैं।
राशन कोटेदारों का कहना है कि जब यह गेहूं दुकानों पर पहुंचने के बाद सूखता है तो उसका वजन दोबारा घटकर वास्तविक स्थिति में आ जाता है। परिणामस्वरूप प्रति बोरा तीन से चार किलो तक की कमी निकलती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कोटेदारों पर डाल दी जाती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और विभागीय कार्रवाई का खतरा भी बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो सरकारी अनाज की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा और पूरी वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता भी कमजोर होगी।
मामले को लेकर जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने बताया कि वायरल वीडियो और शिकायत की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी वितरण प्रणाली को गरीब और जरूरतमंद वर्ग की जीवनरेखा माना जाता है। ऐसे में गोदाम स्तर पर कथित हेराफेरी न केवल व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम जनता के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


