सिर्फ 9 महीने में संवरा संभल का ऐतिहासिक गौरव, ASI के संरक्षण कार्य ने दिलाई नई पहचान

उप्र के संभल जनपद में ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। मुगलकालीन कारवां सराय गेट का जीर्णोद्धार महज 9 महीने में पूरा कर लिया गया है।

सिर्फ 9 महीने में संवरा संभल का ऐतिहासिक गौरव, ASI के संरक्षण कार्य ने दिलाई नई पहचान
Published By- Diwaker Mishra

संभल से राम व्रेश यादव की रिपोर्ट

संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल जनपद में ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। मुगलकालीन कारवां सराय गेट का जीर्णोद्धार महज 9 महीने में पूरा कर लिया गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) मेरठ मंडल की देखरेख में हुए इस संरक्षण कार्य से न सिर्फ इतिहास को नई पहचान मिली है, बल्कि पर्यटन को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि जिलाधिकारी की पहल पर अतिक्रमण हटाकर इस ऐतिहासिक धरोहर को उसका पुराना वैभव वापस दिलाया गया है।

संभल जिले के सोंधन मोहम्मदपुर स्थित ऐतिहासिक कारवां सराय का प्रवेश द्वार अब एक बार फिर अपनी भव्यता के साथ खड़ा है। शाहजहां काल की इस धरोहर का जीर्णोद्धार 13 जून 2025 से शुरू होकर 27 फरवरी 2026 को पूरा हुआ।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मेरठ मंडल की टीम ने पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते हुए इस जर्जर हो चुके ढांचे को नया जीवन दिया है।कारवां सराय गेट मुगलकालीन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

इसमें केंद्रीय मार्ग के साथ दोनों ओर दो-मंजिला पहरेदार कक्ष बने हुए हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां और मेहराबदार प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। जीर्णोद्धार के बाद अब इसकी दीवारों और मेहराबों की सुंदरता साफ झलक रही है।

बताया जाता है कि इस सराय का निर्माण मुगल शासनकाल में संभल-मुरादाबाद के तत्कालीन गवर्नर सैयद मुंसियर खां ने करवाया था। लंबे समय तक उपेक्षा और अतिक्रमण के चलते यह धरोहर जर्जर हो चुकी थी, लेकिन अब प्रशासन और एएसआई के संयुक्त प्रयास से इसे नया स्वरूप दिया गया है।

संभल को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे के नजदीक होने के कारण यहां पर्यटन की संभावनाएं और भी बढ़ गई हैं। साथ ही जिले के पांच अन्य ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की तैयारी भी तेज कर दी गई है।