उप्र पर्यटन विभाग ने बलिया की इन विधानसभाओं में स्वीकृत की 908 लाख रूपये की 08 परियोजनाएं

पर्यटन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य योजनान्तर्गत आजमगढ़ मण्डल के अन्तर्गत आने वाले उप्र के बलिया जनपद के लिए 908 लाख रूपये की पर्यटन विकास की 08 परियोजनायें स्वीकृत की गयी।

उप्र पर्यटन विभाग ने बलिया की इन विधानसभाओं में स्वीकृत की 908 लाख रूपये की 08 परियोजनाएं
Published By- Diwaker Mishra

बलिया से गणेश तिवारी की रिपोर्ट

बलिया/जनमत न्यूज़। पर्यटन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य योजनान्तर्गत आजमगढ़ मण्डल के अन्तर्गत आने वाले उप्र के बलिया जनपद के लिए 908 लाख रूपये की पर्यटन विकास की 08 परियोजनायें स्वीकृत की गयी।

इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए यूपीएसटीडीसी को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए निर्देशित किया गया है कि इन परियोजनाओं के कार्य गुणवत्ता तथा समयबद्धता के साथ पूरा किया जाये। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आज यहाँ दी।

उन्होंने बताया कि अजमगढ़ मण्डल के अन्तर्गत आने वाले बलिया जनपद के रसड़ा विधान सभा क्षेत्र में स्थित लखनेश्वर जी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 50.00 लाख रूपये, बांसडीह विधान सभा क्षेत्र में काली मंदिर के लिए 60.00 लाख रूपये,

सिकन्दरपुर स्थित शिव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 50.00 लाख रूपये तथा बेल्थरा विधान सभा क्षेत्र के अन्तर्गत टीटीडी में राम जानकी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 64.00 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है। 

पर्यटन मंत्री ने बताया कि बलिया नगर में स्थित महर्षि भृगु आश्रम के पर्यटन विकास हेतु  437.00 लाख रूपये, फेफना विधान सभा क्षेत्र में स्थित बाबा मुक्तिनाथ धाम के पर्यटन विकास के लिए 101.00 लाख रूपये

बैरिया विधान सभा में स्थित खपड़ीया बाबा आश्रम श्रीपालपुर के पर्यटन विकास के लिए 51.00 लाख रूपये तथा बेल्थरा में स्थित नगरा ग्राम सभा जमुवाओं में पुरातन शिव मंदिर में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 55.00 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है। 

पर्यटन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में पूरे प्रदेश में आस्था से जुड़े स्थलों के सौंदर्यीकरण तथा अवस्थपना सुविधा उपलब्ध कराने के लिए परियोजनायें स्वीकृत की गयी है।

इन परियोजनाओं के पूरा हो जाने से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन भी सृजित होंगे। इसके अलावा सनातन संस्कृति के मूल्यों को संरक्षित किया जा सकेगा।