जननी सुरक्षा योजना से अमेठी को मिली बड़ी सफलता, 20 महीनों में 44 हजार से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित इस योजना ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं में सुरक्षित संस्थागत प्रसव के प्रति विश्वास को मजबूत किया है, जिसका सकारात्मक असर मातृ मृत्यु दर में कमी के रूप में सामने आया है।

जननी सुरक्षा योजना से अमेठी को मिली बड़ी सफलता, 20 महीनों में 44 हजार से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

अमेठी से राम मिश्रा की रिपोर्ट —

अमेठी/जनमत न्यूज़। जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन से अमेठी जिले ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित इस योजना ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं में सुरक्षित संस्थागत प्रसव के प्रति विश्वास को मजबूत किया है, जिसका सकारात्मक असर मातृ मृत्यु दर में कमी के रूप में सामने आया है।

सूचना विभाग कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 से 20 दिसंबर 2025 तक लगभग 20 महीनों की अवधि में जिले में कुल 44,305 सुरक्षित संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए। इनमें वित्तीय वर्ष 2024-25 (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025) के दौरान 25,307 प्रसव तथा 1 अप्रैल 2025 से 20 दिसंबर 2025 तक 8 माह 20 दिनों की अवधि में 18,998 प्रसव शामिल हैं। यह आंकड़ा जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे पूर्व ग्रामीण इलाकों में घरेलू प्रसव की परंपरा काफी प्रचलित थी।

जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव के बाद पात्र लाभार्थी महिलाओं को प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों या मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करना है, जिससे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचाव हो सके और मां एवं नवजात शिशु दोनों का जीवन सुरक्षित रहे।

अमेठी जिले में योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल संस्थागत प्रसव की दर में तेजी से वृद्धि हुई है, बल्कि प्रसव पूर्व जांच (एएनसी), टीकाकरण और नवजात शिशु देखभाल सेवाओं में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्रदेश में प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में अमेठी जिले में स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की सक्रिय भूमिका ने इस सफलता में अहम योगदान दिया है। आशा बहनों ने घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को योजना के लाभ बताए, समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित किया और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में भी सहायता की। साथ ही जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए गए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना अब केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मातृ मृत्यु दर को कम करने की एक सशक्त रणनीति बन चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य आगामी समय में संस्थागत प्रसव की दर को बढ़ाकर 95 प्रतिशत से अधिक करने का है। योजना के निरंतर प्रभावी संचालन से माताओं और बच्चों का जीवन सुरक्षित हो रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं में आमजन का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।