RMLIMS और यूनिसेफ की बड़ी पहल: यूपी में लेड पर राज्यव्यापी अध्ययन शुरू, 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
लखनऊ के RMLIMS और UNICEF ने उत्तर प्रदेश में सीसा विषाक्तता के आकलन के लिए 'लेड-उत्तर प्रदेश' परियोजना शुरू की। 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ हुआ।
Reported By- Ambuj Kumar & Shailendra Sharma
लखनऊ/जनमत न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में बच्चों और समुदायों को सीसा (Lead) विषाक्तता के खतरों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) और UNICEF ने संयुक्त रूप से "लेड-उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश में लेड के संपर्क का आकलन और पहचान)" परियोजना का शुभारंभ किया है। इसके साथ ही परियोजना से जुड़े अधिकारियों और अन्वेषकों के लिए पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया गया।
संस्थान के प्रशासनिक भवन स्थित निदेशक बोर्ड कक्ष में आयोजित उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम में RMLIMS के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह, यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के चीफ फील्ड ऑफिसर डॉ. ज़कारी एडम सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि सीसा विषाक्तता बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गंभीर प्रभाव डालती है। इससे सीखने की क्षमता प्रभावित होती है और भविष्य की उत्पादकता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सीसा संपर्क की वास्तविक स्थिति और उसके संभावित स्रोतों की वैज्ञानिक पहचान करना है, ताकि भविष्य में साक्ष्य आधारित जनस्वास्थ्य नीतियां तैयार की जा सकें।
कार्यक्रम में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रो. (डॉ.) अमित कौशिक ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं यूनिसेफ के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सीसा एक्सपोजर आकलन, रक्त में सीसा परीक्षण, पर्यावरणीय नमूना संग्रहण, गुणवत्ता नियंत्रण और डेटा प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया।
उद्घाटन समारोह के बाद 16 से 20 जून 2026 तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसमें फील्ड सर्वे, रक्त नमूना संग्रहण, पर्यावरणीय जांच, एक्सआरएफ और लीडकेयर तकनीक के उपयोग सहित विभिन्न तकनीकी पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि सीसा संपर्क से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन राज्य की भविष्य की जनस्वास्थ्य नीतियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने परियोजना को हर संभव सरकारी सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश में पर्यावरणीय स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत बनाने और सीसा विषाक्तता के दुष्प्रभावों से समुदाय को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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