सूचना बोर्ड पर नाम नहीं और न खोली समय सीमा, सांडी मौरम खंड एक का है लाइफ टाइम बीमा

यूपी हो या मध्यप्रदेश खनिज उत्खनन के कारोबार से जुड़े प्रत्येक लाल मौरम या ग्रेनाइट उत्खनन पट्टेधारक को अपने सूचना बोर्ड या खदान मार्ग लगाए गए कंपनी के बोर्ड पर फर्म अथवा कंपनी का नाम, खदान संचालक का नाम एवं खदान संचालन की समयावधि/ समय सीमा लिखना अनिवार्य होता है।

सूचना बोर्ड पर नाम नहीं और न खोली समय सीमा, सांडी मौरम खंड एक का है लाइफ टाइम बीमा
Published By- Diwaker Mishra

बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट

बांदा/जनमत न्यूज़। यूपी हो या मध्यप्रदेश खनिज उत्खनन के कारोबार से जुड़े प्रत्येक लाल मौरम या ग्रेनाइट उत्खनन पट्टेधारक को अपने सूचना बोर्ड या खदान मार्ग लगाए गए कंपनी के बोर्ड पर फर्म अथवा कंपनी का नाम, खदान संचालक का नाम एवं खदान संचालन की समयावधि/ समय सीमा लिखना अनिवार्य होता है।

बांदा मे अधिकांश मौरम पट्टेधारक खाली फर्म का नाम लिखता है लेकिन संचालन कर्ता और समयावधि गायब कर देता है। किन्तु पैलानी के ग्राम सांडी खादर मौरम खंड एक का यह बोर्ड तो कमाल ही किए है जिसमें न तो फर्म/ कम्पनी का नाम अंकित (लिखा) किया गया है। और न ही फर्म प्रोपराइटर का नाम है, न ही खदान की समयावधि खोली गई है।

ग्रामीण एवं इस खंड करोबार से जुड़े गुप्त सूत्रों की मानें तो सांडी खादर मौरम खंड एक में खनन के लिए 6 माह का पट्टा हुआ है। यह केन कैनाल के समीप है। वहीं पूर्वांचल के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद धनंजय सिंह की परोक्ष रूप से इंट्री है।

माइनिंग कंपनी अन्य व्यक्ति के नाम है। जैसा अमूमन रसूखदार ठेकेदार लोग करते है। खंड में इनके भांजे की हनक रहती है। वहीं खदान की रॉयल्टी किसी आरएस माइनिंग, पार्टनर चंद्रशेखर अग्रवाल के नाम से कट रही है।

उक्त मौरम खंड एक सांडी खादर ने आते ही एक क्षेत्रीय पत्रकार महेश द्विवेदी सहित खपटिंहा कला के राहुल सिंह समेत सात नामजद और चार अज्ञात लोगों पर 25 लाख की रंगदारी का मुकदमा लिखाया है। 

वहीं खदान में एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश की धज्जियां उड़ाती प्रतिबंधित अर्थ मूविंग मशीनों का जलजला है। पूर्वाचल के सफेदपोश और अन्यत्र खदानों के सिंघम आजकल बांदा के ग्राम सांडी खंड एक में गरजने लगे है।