फर्रुखाबाद में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल; वायरल ऑडियो से बढ़ा विवाद
फर्रुखाबाद के जहानगंज थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय किशोरी से कथित दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि एक युवक किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ गलत काम किया।
फर्रुखाबाद से वरुण दुबे की रिपोर्ट
फर्रुखाबाद/जनमत न्यूज़:- फर्रुखाबाद के जहानगंज थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय किशोरी से कथित दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि एक युवक किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ गलत काम किया। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने स्थानीय थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती स्तर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही वे तुरंत थाना जहानगंज पहुंचे और आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि, उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें टालने की कोशिश की गई। इस बीच, पुलिस ने आरोपी के बजाय उसके पिता को हिरासत में लिया, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें भी छोड़ दिया गया, जिससे परिवार की नाराजगी और बढ़ गई।
मामला उस समय और अधिक तूल पकड़ गया, जब थाना अध्यक्ष पूनम अवस्थी का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस ऑडियो में वह पीड़िता के चाचा से बातचीत के दौरान कथित रूप से धमकी देती सुनाई दे रही हैं। ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और स्थानीय स्तर पर आक्रोश देखा जा रहा है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें न्याय पाने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है और पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में उन्होंने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया। परिवार के सदस्य पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचे और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल संज्ञान लिया और थाना अध्यक्ष को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन भी दिया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद पुलिस किस प्रकार आगे की कार्रवाई करती है।
यह मामला न केवल एक गंभीर आपराधिक घटना को दर्शाता है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे।
फिलहाल, पूरे मामले पर क्षेत्रीय लोगों की नजर बनी हुई है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं प्रशासन पर भी निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है

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