भदोही: हनुमान जयंती पर उमड़ा आस्था का सागर; 56 भोग, सुंदरकांड पाठ और भव्य अनुष्ठानों से गूंजा सीतामढ़ी
उप्र के भदोही जनपद का सीतामढ़ी अंजनी पुत्र भगवान हनुमान की जयंती पर गुरुवार को भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया।
भदोही से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
भदोही/जनमत न्यूज़। उप्र के भदोही जनपद का सीतामढ़ी अंजनी पुत्र भगवान हनुमान की जयंती पर गुरुवार को भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया। शहर से लेकर गांव तक मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हर तरफ ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों से माहौल गूंजता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
बारीपुर के रुद्रपति दुबे उर्फ़ श्रवण दुबे ने वर्षों पुरानी परंपरा निभाई और 108 फीट हनुमान जी के दर्शन कर 56 भोग के साथ सुंदरकांड का पाठ एवं प्रसाद वितरण किया। शहर के प्रमुख आकर्षण 108 फीट ऊंचे हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे।
मंदिर परिसर को फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था, जिसने श्रद्धालुओं को खासा आकर्षित किया। मंदिर प्रबंधन के कैलाश चंद्र ने बताया कि भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए, जिससे भक्तों को दर्शन में कोई परेशानी न हो।
हनुमान जयंती के अवसर पर दिनभर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ का आयोजन चलता रहा। इस दौरान बारीपुर निवासी रुद्रपति दुबे उर्फ़ श्रवण दुबे ने अपनी वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए भगवान हनुमान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया।
उनकी इस श्रद्धा और समर्पण को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। भोग के बाद प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ ग्रहण किया। शाम होते-होते मंदिरों में विशेष आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
दीपों की रोशनी और घंटों की गूंज के बीच पूरा वातावरण भक्ति में डूब गया। इसके अलावा महर्षि वाल्मीकि आश्रम, बाबा धवासनाथ आश्रम, सीताधाम मोनी बाबा आश्रम और उड़िया बाबा आश्रम में भी हनुमान जयंती पर भव्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन स्थलों पर सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भागीदारी रही। पंडित अरुण महाराज ने बताया कि हनुमान जयंती का पर्व केवल आस्था ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और विश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इस दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कुल मिलाकर, सीतामढ़ी में हनुमान जयंती का पर्व पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया, जहां हर चेहरा भक्ति में डूबा नजर आया और हर जुबान पर बजरंगबली का नाम था।

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