रायफल क्लब मैदान में 80 दिन की प्रदर्शनी पर उठे सवाल, नाममात्र किराए व एनओसी प्रक्रिया पर विवाद

जिस रायफल क्लब मैदान को पहले व्यावसायिक उपयोग से बचाने के लिए व्यापक विरोध हुआ था, उसी मैदान को अब अस्थायी रूप से प्रदर्शनी के लिए किराए पर देना कई सवाल खड़े करता है।

रायफल क्लब मैदान में 80 दिन की प्रदर्शनी पर उठे सवाल, नाममात्र किराए व एनओसी प्रक्रिया पर विवाद
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट —

बांदा/जनमत न्यूज। बांदा शहर के प्रमुख एवं व्यस्त क्षेत्र स्थित रायफल क्लब मैदान में 80 दिनों के लिए आयोजित “फन एंड फेयर प्रदर्शनी” को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस प्रदर्शनी का ठेका एक वरिष्ठ अफसर के रिश्तेदार को दिया गया है, जिसमें नगरपालिका और विकास प्राधिकरण की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, यह प्रदर्शनी 10 मार्च से 30 मई 2026 तक आयोजित की जा रही है। इसके लिए नगरपालिका द्वारा करीब 90 हजार 200 रुपये का किराया निर्धारित किया गया है, जिसमें 41 हजार रुपये शुल्क और 49 हजार 200 रुपये अपशिष्ट प्रबंधन शुल्क शामिल बताया गया है। जबकि शहर के मध्य स्थित इस बहुमूल्य जमीन का सर्किल रेट लगभग 10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर बताया जा रहा है और कुल भूमि का मूल्य करोड़ों में आंका जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस रायफल क्लब मैदान को पहले व्यावसायिक उपयोग से बचाने के लिए व्यापक विरोध हुआ था, उसी मैदान को अब अस्थायी रूप से प्रदर्शनी के लिए किराए पर देना कई सवाल खड़े करता है। इससे पहले भी इस मैदान को नीलामी के जरिए व्यावसायिक उपयोग में लाने के प्रयासों का विरोध जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों द्वारा किया गया था। मामला उच्च न्यायालय में भी लंबित बताया जा रहा है।

प्रदर्शनी को मिली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रक्रिया भी विवादों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि नगर मजिस्ट्रेट के पत्र के बाद विकास प्राधिकरण ने उसी दिन एनओसी जारी कर दी, जबकि नगरपालिका ने भी कुछ ही दिनों में प्रक्रिया पूरी कर दी। इतनी तेजी से हुई कार्यवाही को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस आयोजन में कथित रूप से प्रभावशाली लोगों की भूमिका बताई जा रही है। साथ ही यह भी आरोप है कि खेल मैदानों का इस तरह व्यावसायिक उपयोग नियमों के विपरीत है। पर्यावरण और सार्वजनिक उपयोग से जुड़े नियमों के तहत ऐसे मामलों में सख्ती की आवश्यकता बताई जा रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं।

फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से पारदर्शी जांच व उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।