फिरोजाबाद में अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना पर उठे सवाल, मानकों की अनदेखी के आरोप
मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में 10 नवीन हेल्थ सेंटर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव था।
फिरोजाबाद से विमल की रिपोर्ट —
फिरोजाबाद/जनमत न्यूज। जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे नवीन हेल्थ बैलेंस सेंटर (अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर) की स्थापना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि निर्धारित मानकों की अनदेखी कर कुछ केंद्र ऐसे स्थानों पर स्थापित कर दिए गए हैं, जो दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।
मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में 10 नवीन हेल्थ सेंटर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव था। इसके लिए भवनों का चयन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाना था।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर ऐसे स्थान पर स्थापित होना चाहिए जहां से निकटतम सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर हो। साथ ही भवन में पर्याप्त वेंटिलेशन, सूर्य प्रकाश, मरीजों के बैठने की व्यवस्था, खुला परिसर, शौचालय, बिजली-पानी, पार्किंग और एंबुलेंस के लिए सुगम मार्ग जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, चयनित कुछ अर्बन सेंटर इन मानकों पर खरे नहीं उतरते। आरोप है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा जांच अधिकारियों की संस्तुति के आधार पर ऐसे भवनों को भी स्वीकृति दे दी गई, जो मानकों के अनुरूप नहीं थे।
बताया जा रहा है कि टूंडला चौराहे के पास न्यू शिवपुरी कॉलोनी एटा रोड और न्यू शिव नगर एटा रोड पर स्थापित दो अर्बन सेंटर एक-दूसरे से लगभग एक किलोमीटर के दायरे में हैं, जबकि समीप ही सरकारी सीएससी केंद्र भी मौजूद है। ऐसे में दूरी संबंधी दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई केंद्र छह माह से अधिक समय से संचालित बताए जा रहे हैं, लेकिन वहां मरीजों की संख्या नगण्य है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि केंद्रों के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं हुआ, जिससे आम जनता को इसकी जानकारी तक नहीं है।
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि भवन चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर जनपद में चर्चा तेज है और संबंधित केंद्रों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि गरीबों को मिलने वाली निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
अब निगाहें शासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों की जांच किस प्रकार कराते हैं और क्या कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

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