रामपुर बना ‘मिनी कोलकाता’, मछली बीज उत्पादन में 27% उछाल—10 हजार मीट्रिक टन पार, हजारों को रोजगार

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली आपूर्ति में सुधार, सोलर ऊर्जा का उपयोग और कोल्ड स्टोरेज व प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा दिया जाए, तो रामपुर का मत्स्य उद्योग और अधिक ऊंचाइयों को छू सकता है।

रामपुर बना ‘मिनी कोलकाता’, मछली बीज उत्पादन में 27% उछाल—10 हजार मीट्रिक टन पार, हजारों को रोजगार
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

रामपुर से अभिषेक शर्मा की रिपोर्ट —

रामपुर//जनमत न्यूज। मुरादाबाद मंडल का रामपुर जनपद अब पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन और मछली बीज उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए उत्पादन में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। इस वृद्धि के साथ कुल मछली उत्पादन 10,402 मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है, जो न केवल जिले बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक प्रशांत गंगवार के अनुसार, जिले में वर्तमान में 56 हैचरी संचालित हो रही हैं, जहां से करीब 200 करोड़ मछली बीज की आपूर्ति उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों—दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब तक की जा रही है। उत्पादन में वृद्धि के साथ रोजगार सृजन भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र से सीधे तौर पर 3846 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

सरकारी योजनाओं से मिली मजबूती
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग ने रामपुर को ‘मिनी कोलकाता’ की पहचान दिलाई है। इस योजना के अंतर्गत तालाब पट्टाधारकों को बीज और चारे के लिए प्रति हेक्टेयर 1.60 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है। जिले में अब तक 419 हेक्टेयर तालाब पट्टे पर दिए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

फौजी फिश हैचरी बनी प्रेरणा का केंद्र
तहसील मिलक के ग्राम धनौरा में संचालित ‘फौजी फिश हैचरी’ क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। वर्ष 2002 से संचालित इस हैचरी में रोहू, नैन, ग्रास, सिल्वर और कतला जैसी मछलियों का उच्च गुणवत्ता वाला बीज तैयार किया जा रहा है। 70 से 80 लाख रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाली यह इकाई 100 से 150 लोगों को रोजगार दे रही है। यहां एरेटर मशीन पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने से उत्पादन क्षमता और बढ़ी है।

सहकारी समितियों की अहम भूमिका
मत्स्य पालन के विस्तार में सहकारी समितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शाहाबाद तहसील के ग्राम कीरा में मत्स्य जीवी सहकारी समिति द्वारा 264 हेक्टेयर सामुदायिक और निजी तालाबों में मत्स्य पालन किया जा रहा है। यह समिति स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी मछली की आपूर्ति कर रही है, जिससे सालाना 10 से 15 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है।

आधुनिक तकनीकों से उत्पादन में क्रांति
जिले में पारंपरिक तरीकों के साथ ‘बायोफ्लॉक’ और ‘आरएएस’ जैसी आधुनिक तकनीकों को भी तेजी से अपनाया जा रहा है। आरएएस तकनीक के माध्यम से सीमित जल संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है। वर्तमान में रामपुर में चार बायोफ्लॉक और एक आरएएस यूनिट सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। इसके अलावा नाव खरीदने पर 40 प्रतिशत सब्सिडी जैसी योजनाएं भी मत्स्य पालकों को आकर्षित कर रही हैं।

भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली आपूर्ति में सुधार, सोलर ऊर्जा का उपयोग और कोल्ड स्टोरेज व प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा दिया जाए, तो रामपुर का मत्स्य उद्योग और अधिक ऊंचाइयों को छू सकता है।

रामपुर का यह विकास मॉडल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि देश के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है।