कुशीनगर से प्रदीप यादव की रिपोर्ट —
कुशीनगर/जनमत न्यूज। बिहार से बिना ISTP (ई-ट्रांजिट पास) के कुशीनगर में प्रवेश कर रही बालू लदी सैकड़ों ट्रकें हर महीने सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रही हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान चलाने के बावजूद माफिया और बिचौलियों के गठजोड़ के चलते यह अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यूपी-बिहार बॉर्डर पर बहादुरपुर पुलिस चौकी के पास NH-28 पर लगे स्कैनिंग सेंसर से बचने के लिए ट्रक चालक तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कई ट्रकों के नंबर प्लेट पर जानबूझकर कीचड़ या कालिख पोत दी जाती है, जबकि कुछ वाहनों में नंबर प्लेट को कपड़े से ढक दिया जाता है, जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो जाती है।
सुबह के समय पडरौना क्षेत्र में दर्जनों बालू लदे ट्रक तेज रफ्तार से गुजरते देखे जा सकते हैं, जिनकी नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं होती। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग इस पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ नजर आ रहा है, जिससे विभागीय मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है।
खनन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों से संपर्क करने के प्रयासों के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। वहीं, एआरटीओ विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं दिखी है।
पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित कर जांच और कार्रवाई का निर्देश दिया है। सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कारोबार में बॉर्डर क्षेत्र के कई बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध है, जिनकी हालिया आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव देखा गया है। कम समय में अर्जित संपत्ति और लग्जीरियस जीवनशैली कई सवाल खड़े कर रही है।
यह पूरा मामला प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़ा करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और जिला प्रशासन इस अवैध खनन माफिया पर कितना सख्त एक्शन लेते हैं या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।