भेड़िये के आतंक से दहशत में गांव, बच्चों की सुरक्षा में माताएं हाथों में लाठी-डंडा लेकर रातभर दे रही पहरा

लगातार हो रहे हमलों से दहशत में जी रहे ग्रामीणों ने पहले पुरुषों के जरिए रातभर पहरेदारी की, लेकिन अब बच्चों की माताएं भी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ गई हैं। हाथों में लाठी-डंडा लेकर माताएं पूरी रात जागकर गांव-गांव गश्त कर रही हैं और मासूमों की सुरक्षा का बीड़ा उठा लिया है।

भेड़िये के आतंक से दहशत में गांव, बच्चों की सुरक्षा में माताएं हाथों में लाठी-डंडा लेकर रातभर दे रही पहरा
REPORTED BY - RIZWAN KHAN, PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

बहराइच/जनमत न्यूज। जनपद बहराइच के कैसरगंज इलाके में भेड़िये का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुनसान इलाकों से निकलकर यह खूंखार जानवर लगातार मासूम बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। अब तक इसके हमले में चार मासूमों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 से अधिक लोग घायल होकर अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।

लगातार हो रहे हमलों से दहशत में जी रहे ग्रामीणों ने पहले पुरुषों के जरिए रातभर पहरेदारी की, लेकिन अब बच्चों की माताएं भी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ गई हैं। हाथों में लाठी-डंडा लेकर माताएं पूरी रात जागकर गांव-गांव गश्त कर रही हैं और मासूमों की सुरक्षा का बीड़ा उठा लिया है।

मझारा तौकली इलाके के करीब एक दर्जन गांव—बभनन पुरवा, भिरगू पुरवा, बाबा पटाव, देवनाथ पुरवा, गांधीगंज आदि—भेड़िये के आतंक से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां लोग दिन-रात दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

रात में पहरा दे रही महिलाओं ने बताया कि वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। भेड़िया बच्चों के अलावा महिलाओं और पुरुषों को भी निशाना बना रहा है, लेकिन विभाग उसे पकड़ पाने में नाकाम साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उस दिन का इंतजार है जब यह आदमखोर पिंजरे में कैद होगा और वे अपने बच्चों के साथ चैन की नींद सो पाएंगे।