चारा लेने गए किसान पर बाघ का हमला, मौत के बाद ग्रामीणों का हाइवे पर प्रदर्शन

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि क्षेत्र में लगातार सक्रिय बाघ को जल्द से जल्द पकड़ा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

चारा लेने गए किसान पर बाघ का हमला, मौत के बाद ग्रामीणों का हाइवे पर प्रदर्शन
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

लखीमपुर से लोकेन्द्र प्रताप की रिपोर्ट —

लखीमपुर खीरी/जनमत न्यूज। Lakhimpur Kheri जिले के थाना हैदराबाद क्षेत्र के नंदलालपुर गांव में सोमवार को बाघ के हमले में एक किसान की मौत हो जाने से इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और हमलावर बाघ को पकड़ने के साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नंदलालपुर गांव का एक किसान जानवरों के लिए चारा लेने खेत की ओर गया था। इसी दौरान घात लगाए बैठे बाघ ने उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल किसान को परिजन और ग्रामीण तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब किसान का शव गांव पहुंचा तो परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। हजारों की संख्या में ग्रामीण शव को लेकर मोहम्मदी–सिकंदराबाद हाईवे पर पहुंच गए और सड़क पर शव रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे मार्ग पर यातायात बाधित हो गया और लंबा जाम लग गया।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि क्षेत्र में लगातार सक्रिय बाघ को जल्द से जल्द पकड़ा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। साथ ही मृतक किसान के परिवार को सरकार की ओर से उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से इलाके में बाघ की गतिविधियां बढ़ गई हैं। खेतों और जंगल से सटे क्षेत्रों में काम करने वाले किसान और मजदूर भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

घटना की सूचना पर थाना हैदराबाद प्रभारी सुनील मालिक सहित पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।