संभल में अंबेडकर प्रतिमा को लेकर बवाल, महिलाओं का विरोध—प्रशासन को हटना पड़ा पीछे
संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन को फिलहाल पीछे हटना पड़ा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को थाने बुलाकर बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी वहां नहीं पहुंचा। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने गांव में ही रहकर लोगों से संवाद जारी रखा।
संभल से रामब्रेस यादव की रिपोर्ट —
संभल/जनमत न्यूज। उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती से ठीक पहले उनकी प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित किए जाने की सूचना पर प्रशासन मौके पर पहुंचा तो ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। इस दौरान महिलाओं ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ आक्रोश जताते हुए चप्पल तक दिखाईं, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
चंदौसी तहसील क्षेत्र के कुढ़ फतेहगढ़ थाना इलाके के डारनी गांव में प्रतिमा स्थापना को लेकर स्थिति अचानक बिगड़ गई। प्रशासन द्वारा कार्रवाई की कोशिश के दौरान महिलाओं ने प्रतिमा को घेर लिया और पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। इतना ही नहीं, पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को भी महिलाओं ने छुड़ा लिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम चंदौसी आशुतोष तिवारी, सीओ दीपक तिवारी, तहसीलदार रवि सोनकर और थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद हालात देर रात तक तनावपूर्ण बने रहे और करीब 10 बजे तक हंगामा चलता रहा।
ग्रामीणों का एक वर्ग जहां बिना अनुमति प्रतिमा लगाए जाने का विरोध कर रहा था, वहीं दूसरा पक्ष प्रतिमा हटाने की कार्रवाई के खिलाफ डटा रहा। इस दोहरे विरोध के कारण प्रशासन के सामने स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया।
संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन को फिलहाल पीछे हटना पड़ा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को थाने बुलाकर बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी वहां नहीं पहुंचा। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने गांव में ही रहकर लोगों से संवाद जारी रखा।
अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह के अनुसार, प्रतिमा जिस भूमि पर स्थापित की गई है, वह समिति के नाम दर्ज निजी भूमि है और निर्माण कार्य करीब डेढ़ साल पुराना है। प्रतिमा लगभग 10 दिन पहले स्थापित की गई, लेकिन इसकी सूचना प्रशासन को नहीं दी गई और न ही कोई अनुमति ली गई थी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल ग्रामीणों की सहमति से प्रतिमा को सम्मानपूर्वक ढक दिया गया है और समिति को निर्देश दिया गया है कि वे सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त करें। अनुमति मिलने तक आगे की कार्रवाई रोक दी गई है।
14 अप्रैल को मनाई जाने वाली अंबेडकर जयंती से पहले इस तरह का विवाद प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। फिलहाल प्रशासन शांति बनाए रखने और आपसी सहमति से समाधान निकालने की कोशिश में जुटा है।

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