बरेली पशुपालन विभाग में बड़ा खेल, बिना ड्यूटी आए जारी हो रहा सरकारी अधिकारियों का वेतन!
उप्र के बरेली जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पशुपालन विभाग में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर अनियमितताओं के चलते आरोप लग रहे हैं।
बरेली से अनूप रायजादा की रिपोर्ट
बरेली/जनमत न्यूज़। उप्र के बरेली जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पशुपालन विभाग में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर अनियमितताओं के चलते आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कार्यालय अपर निदेशक (ग्रेड-2), बरेली के अधीन कार्यरत डॉ. राजकुमार सिंह (संयुक्त निदेशक, तरल नत्रजन केंद्र, बरेली) एक बंद/निष्क्रिय संस्था पर तैनात हैं, फिर भी नियमित रूप से वेतन आहरित किया जा रहा है।
हफ्ते में एक बार उपस्थिति, फिर भी पूरा वेतन?
सूत्रों के मुताबिक संबंधित अधिकारी नियमित ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते। सप्ताह में केवल एक बार कार्यालय आकर औपचारिकता निभाते हैं। शेष समय डेली अप-डाउन करते हुए कार्यप्रणाली से दूर रहते हैं।
DM के आदेशों की खुलेआम अनदेखी
जिला अधिकारी (DM) बरेली के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी जिला स्तरीय अधिकारी प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक जनसुनवाई हेतु कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। आरोप है कि संबंधित अधिकारी इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। जिससे जनसुनवाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
अपर निदेशक कार्यालय की भूमिका संदिग्ध
सबसे बड़ा सवाल यह सब कुछ अपर निदेशक (ग्रेड-2), बरेली के संज्ञान में होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
क्या है पूरा मामला
आरोप है कि बंद संस्थान पर तैनाती दिखाकर बिना नियमित उपस्थिति के सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। यानी “ना तुम कहो हमारी, ना हम कहें तुम्हारी” वाली स्थिति में पूरा तंत्र सवालों के घेरे में है।
जांच की मांग तेज
अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। वेतन आहरण, उपस्थिति रजिस्टर और कार्य विवरण की ऑडिट जांच कराई जाए। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
सरकार की छवि पर असर
ऐसे मामलों से सरकार की पारदर्शिता और सुशासन की छवि को नुकसान होता है। आम जनता का भरोसा कमजोर होता है।

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