सात समंदर पार तक बांदा की शजर सखियों का जलवा
बांदा (जनमत) - यूपी के बाँदा जिले में महिलाओं ने एक मिशाल कायम की है. जब खुद के हौसलों में उड़ान और इरादों में मजबूती हो तो सफलता की चमक पत्थर को भी हीरा बना देती है। सीएम योगी आदित्यनाथ के महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन और आर्थिक मजबूती के विजन को धरातल पर उतारते हुए बांदा की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई इबादत लिख रही हैं। जिसकी सबसे बड़ी विशाल बनी है बांदा शहर की रहने वाली सुमन सोनी, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि बुंदेलखण्ड की नारी अब बेचारी नहीं बल्कि उद्यमी है। बांदा के विश्व प्रसिद्ध शजर पत्थर उद्योग में सुमन सोनी एक ऐसी मिसाल बनकर उभरी हैं। जिन्होंने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया। बल्कि सूक्ष्म सखी के रूप में अन्य महिलाओं के जीवन में भी रोशनी भरने का काम किया है।
कौशल विकास उन्नयन योजना के प्रशिक्षण के बाद शुरू हुई सफलता की यात्रा
सुमन सोनी की सफलता की यात्रा कौशल विकास उन्नयन योजना के तहत मिले प्रशिक्षण के बाद शुरू हुई। जिसके बाद इन्होंने अपनी उद्यमिता को विस्तार देने के लिए सरकार से 10 लाख रुपए का ऋण लिया। इस पूंजी के निवेश ने उनके छोटे से कम को एक व्यवस्थित सूक्ष्म उद्योग में बदल दिया और उनके घर में लगे सूक्ष्म उद्योग से शुरू हुआ यह काम आज ग्लोबल सफर कर रहा है। सुमन ने अपने घर में ही उद्योग लगा रखा है जहां पर शजर पत्थर की तराश और नक्काशी कर खूबसूरत आभूषण, ब्रोच, कफलिंग और सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं।
स्टेट अवार्ड से भी सुमन सोनी हो चुकी हैं सम्मानित
सुमन सोनी व इनके साथ जुड़ी महिलाओं के द्वारा निर्मित उत्पाद जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका और ईरान जैसे देशों में निर्यात किए जाते हैं। आज सुमन के साथ लगभग 35 अन्य महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। जिससे वे सभी भी आत्मनिर्भर बन रही है और यह महिलाएं न केवल अपना घर संभाल रही हैं बल्कि अपने हुनर से अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ भी बन रही है। कड़ी मेहनत और सही दिशा का परिणाम है कि सुमन सोनी आज प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपए की बचत कर लेती है और उनके इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें स्टेट अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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