बांदा: महिला किसान नेतृत्वकर्ता के साथ ग्रामीणों ने मंडलायुक्त को सौंपा पांच खदानों का लेखाजोखा, कार्यवाही की मांग

उप्र के बांदा जनपद में शुक्रवार 17 अप्रैल को चित्रकूट धाम मंडल आयुक्त से मिलकर उन्हें जिले में संचालित पांच मौरम खंडों के कागजी हेराफेरी का जिक्र करते हुए शिकायत पत्र देकर कार्यवाही की मांग उठाई है।

बांदा: महिला किसान नेतृत्वकर्ता के साथ ग्रामीणों ने मंडलायुक्त को सौंपा पांच खदानों का लेखाजोखा, कार्यवाही की मांग
Published By- Diwaker Mishra

बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट

बांदा/जनमत न्यूज़। उप्र के बांदा जनपद में शुक्रवार 17 अप्रैल को चित्रकूट धाम मंडल आयुक्त से मिलकर उन्हें जिले में संचालित पांच मौरम खंडों के कागजी हेराफेरी का जिक्र करते हुए शिकायत पत्र देकर कार्यवाही की मांग उठाई है। जिसमें मरौली खंड 4,5,6 और सांडी खादर मौरम खंड एक सहित सदर तहसील की दुरेड़ी मौरम खदान शामिल है।

जिले में चल रही दो दर्जन मौरम खदानों में से पांच मौरम खंडों के कागजी हेराफेरी को महिला किसान नेतृत्वकर्ता एवं अन्य युवा किसानों ने मंडल आयुक्त से मिलकर शिकायत पत्र दिया है। इस विस्तृत प्रार्थना पत्र के साथ जीपीएस फोटो एवं उनके मूल लीज रजिस्ट्री होल्डर के बनिस्बत दूसरे ठेकेदारों द्वारा उक्त खंड संचालन की जानकारी का खुलासा किया गया है।

उल्लेखनीय है कि बीते 17 अप्रैल दिन शुक्रवार को मंडल आयुक्त के समक्ष उपस्थित महिला नेतृत्व कर्ता एवं एनजीटी याचिका कर्ता ऊषा निषाद सहित अर्चना निषाद, बाबी यादव, पुष्पा आदि ने साक्ष्यों के साथ मंडल आयुक्त को बताया कि मरौली मे खंड संख्या 4 एवं 6  जिला बांदा अंतर्गत तहसील पैलानी के ग्राम सांडी खादर में मौरम खंड संख्या 1 में खसरा गाटा 179,180,177,147 का भाग 144 का भाग, 141 का भाग,143,145, 142, 122,121,114 का भाग व 117 का भाग कुल रकबा 46 हेक्टेयर स्वीकार किया गया है।

यहां यह बतलाना आवश्यक है कि उप खनिज मौरम खनन लीज रजिस्ट्री सदर रजिस्ट्रार दफ्तर में सिल्वर लाइन ऑटो मोबाइल्स स्टेशन रोड, एमजी रोड सतना (मप्र) प्रोपराइटर देवव्रत सिंह पुत्र स्वर्गीय दशरथ सिंह निवासी मुख्तयारगंज, तहसील रघुराजपुर, जिला सतना के नाम दिनांक 10.12.2018 एवं अनुबंध दिनांक 18.12.2018 रजिस्ट्री हुई थी।

किन्तु वर्तमान में ग्राम सांडी खादर में यह मौरम खंड 1 विगत दिनांक 9 मार्च 2026 से शुरू हुआ था। जिस क्रम में दिनांक 1.04.2026 की खदान रॉयल्टी एमएम 11 प्रपत्र मुताबिक यह मेसर्स आर.एस. माइनिंग पार्टनर चंद्रशेखर अग्रवाल के नाम से काटी गई है।

शिकायत कर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब मौरम खंड लीज रजिस्ट्री को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है तब यह मौरम खंड मूल रजिस्ट्री फर्म सिल्वर लाइन ऑटो मोबाइल्स की जगह अब मेसर्स आर.एस. माइनिंग द्वारा किन कारणों से संचालित किया जा रहा है यह गंभीर जांच का विषय है।

क्या मूल रजिस्ट्री एवं फर्म ऑनर ने मौखिक तौर पर यह मौरम खदान वर्तमान ठेकेदार को बेचकर मुनाफा कमाया है या फिर सरकारी दस्तावेज में यह हेराफेरी की गई है।

उन्होंने पत्र में लिखा कि विडम्बना है कि अन्य मौरम खंड में भी यही किया गया है जिसका जिक्र इस पत्र में है। यकीनन यही मुख्य कारण है कि ग्राम सांडी खादर मौरम खंड 1 में इस खदान के सूचना बोर्ड पर पर सिर्फ सांडी खादर नम्बर 1 मौरम खदान चालू है।

सिर्फ यही जानकारी सार्वजनिक की गई है। जबकि खदान संचालक को खनन मार्ग पर सूचना बोर्ड में फर्म का नाम, ऑनर का नाम, खंड संख्या एवं समयावधि डिस्प्ले अर्थात लिखने की अनिवार्यता होती है।

ज्ञापन एवं शिकायत करने वालों ने आरोप लगाया कि मौरम खंड सांडी खादर एक केन कैनाल पंप के समीप पड़ता है जिससे आसपास के दर्जनों गांवों को इसी कैनाल से किसानों को सिंचाई जलापूर्ति की जाती है। केन कैनाल पर भी जलसंकट मंडरा रहा है। इस मौरम खंड एक में गोपनीय सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल के पूर्व बसपा सांसद एवं बाहुबली धनंजय सिंह का परोक्ष दखल है।

खंड में किसी अंकित सिंह निवासी वैशाली, गाजियाबाद का रसूख गांव स्तर पर चल रहा है। वे लिखतें है कि दुखद मसला है कि वनविभाग ने इस मौरम खंड को अपने वनक्षेत्र से परिवहन आवागमन का रास्ता भी दिया है।

साथ ही सांडी खादर के मौरम खंड एक में वर्तमान समय में मेसर्स आर.एस. माइनिंग ओवरलोडिंग कर रही है जो हमीरपुर की सरहद बेरी- बैजेमऊ तक दूसरे जिले से मौरम का अवैध उठान हो रहा है।

नदी की जलधारा यहां टूट रही है। महिला किसान नेतृत्व कर्ता ऊषा निषाद की मानें तो इस खदान संचालक से जुड़े अंकित सिंह ने आते गांव-क्षेत्र को भयाक्रांत करने के वास्ते इलाके के 11 लोगों पर कूटरचित घटनाक्रम बनकर पुलिस और खपटिंहा कला के एक झोलाछाप डॉक्टर के सहयोग से रंगदारी मांगने का मुकदमा लिखाया है।

वहीं मीडिया को साधने में खपटिंहा कला के पंकज चतुर्वेदी की भूमिका संदिग्ध है। जिससे कोई पत्रकार और किसान इनके विरुद्ध आवाज बुलंद नहीं करता है। वहीं इस खदान में एनजीटी के दिशानिर्देश की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

जिससे गांव की जैवविविधता, नदी की संरचना एवं किसानों के सिंचाई हेतु उपलब्ध जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है । केन नदी मे उत्खनन से जल स्रोत का माफियाओं द्वारा क्षेत्र में दोहन बढ़ता जा रहा है।

प्रार्थना पत्र के साथ उन्होंने सदर तहसील के थाना मटौंध अंतर्गत ग्राम मरौली खादर में चट चटगन बार्डर पर संचालित हो रही मौरम खंड क्रमशः 4 भी मूल रजिस्ट्री में अनुबंध दिनांक 8.01.2021 अनुसार मेसर्स वी.पी. कंस्ट्रक्शन प्रोपराइटर  विजय पाल प्रजापति पुत्र बौरा प्रजापति निवासी मकान संख्या जे -49, साउथ सिटी,रायबरेली रोड,थाना पीजीआई जिला लखनऊ के नाम इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 एक्ट संख्या 9 के अंतर्गत रजिस्ट्री हुई थी। जिसमें खसरा गाटा संख्या 333/7 का भाग 412, 413, 114 कुल 23, हेक्टेयर उप खनिज लीज की गई थी।

किन्तु यहां भी वर्तमान में विगत नवंबर 2025 से अगस्त्या एग्रो प्राइवेट लिमिटेड पट्टेधारक मल्लमपत्ती मुरली द्वारा संचालित की जा रही है। जो कि विधि संगत मूल रजिस्ट्री हस्तांतरण सदर बगैर कानूनी रूप से अवैध है।

इस मौरम खंड मे वर्तमान समय में लीज संचालक मल्लमपत्ती मुरली के करीबी नुनु झा एवं ग्राम मरौली के पूर्व प्रधान एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश साहू एवं इनके भाई राजेश साहू जो कि सरकारी प्राइमरी अध्यापक  (किसानों की खेतिहर भूमि से बिना जिलाधिकारी की स्वीकृति के रास्ता मैनेजमेंट लिए है।)

वहीं खदान में गांव के दबंग संतोष यादव का भतीजा अजय यादव प्रबंधन का कामकाज एवं मीडिया को रुपया बांटने का कार्य करवाता है। यहां भी सूचना बोर्ड में "मरौली खंड 4 चालू है।" इतनी जानकारी सार्वजनिक की गई है।

वहीं यहां नदी की जलधारा में अवैध पुल बनाकर परिवहन निकासी खनिज अधिकारी राज रंजन एवं खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मंडलीय क्षेत्रीय अधिकारी की बदौलत होता है। रातदिन इस मौरम खंड में माननीय एनजीटी एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हो रही है।

इसी ग्राम मरौली खादर के खंड संख्या 6 की मूल रजिस्ट्री भी हस्ताक्षर दिनांक 14.01.2020 एवं अनुबंध दिनांक 01.03.2021 के मुताबिक थिंकहोम इंफ्राबुल्ड प्राइवेट लिमिटेड निदेशक दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी पुत्र दिवाकर प्रसाद त्रिपाठी निवासी 589 ख/323 सुभाष नगर, तेलीबाग, लखनऊ यूपी के नाम रजिस्ट्री हुई थी।

किन्तु यह भी वर्तमान में सूचना विभाग से जारी प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 12 अप्रैल 2026 मुताबिक आनंदेश्वर केमटेक प्राइवेट लिमिटेड संचालक आनंद गुप्ता द्वारा संचालित की जा रही है। जिसमें पर्दे के पीछे से जिला हमीरपुर के ग्राम निवादा (बिवार) निवासी बलवंत सिंह उर्फ गुड्डू सिंह भी पार्टनर है।

शिकायत कर्ताओं ने बताया कि इस मौरम खंड 6 का रास्ता ग्राम लुकतरा,चट चटगन होते हुए बनाया गया है। ग्राम लुकतरा के बाहर खदान मार्ग पर सूचना बोर्ड में इन्होने अपूर्ण जानकारी अंकित की है जिससे गोपनीयता बनी रहे कि रजिस्ट्री किसके नाम हुई थी।

मरौली खादर के इस खंड 6 में गांव के लंबरदार किसान एवं 450 बीघा के काश्तकार एडवोकेट अशोक अवस्थी अपने खेतों से अवैध रूप से खनन भूखंड के बाहर उत्खनन करा रहें है। जिसकी तस्दीक ग्राउंड पर लुकतरा मार्ग से जाकर या ड्रोन मैपिंग से की जा सकती है।

एनजीटी के आदेशों के क्रम में पर्यावरण संरक्षण एवं नदी कैचमेंट क्षेत्र में अर्थ मूविंग मशीनों से मौरम निकासी प्रतिबंधित है लेकिन ऐसा हो रहा है। वहीं खनिज टास्क फोर्स हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है सिर्फ खानापूर्ति को फौरी कार्यवाही होती है।

पत्र अनुसार थाना मटौंध के ग्राम मरौली खादर के ही खंड 5 फर्म संचालक डेस्कान बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड निदेशक संजीव गुप्ता पुत्र प्रेमचंद गुप्ता निवासी 128/189, के. ब्लॉक, किदवई नगर,कानपुर द्वारा पांच वर्ष के लिए हुए लीज दिनांक 03.05.2023 मुताबिक गाटा संख्या 333/7 का भाग खंड 5 कुल रकबा 23 हेक्टेयर में कई बार खनिज टीम ने जिलाधिकारी के आदेश पर जांच करके इस खदान पर पिछले सत्र में आर्थिक जुर्माना हुए है।

किन्तु अवैध खनन विशेषज्ञ संजीव गुप्ता मीडिया, अफसरों और ताकत के दम से स्थानीय सपा नेता जो रजिस्ट्री में है के साथ मिलकर जिले के तहबाजारी ठेकेदार शक्ति सिंह  की नेटवर्किंग में ताबड़तोड़ अवैध खनन करके पिछले 4 साल में ग्राम मरौली खादर में केन नदी की भौगोलिक स्थिति एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों को पूरी तरह नष्ट कर रहे है। गांव भयावह जल संकट और नदी के अस्तित्व संकट से जूझने लगा है।

कमोबेश यही सूरत सदर तहसील के ग्राम दुरेड़ी में संचालित रिद्धि सिद्धि हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड निदेशक देवेन्द्र सिंह भाटी क्षेत्रफ़ल 66.71 हेक्टेयर खनन समयावधि 11 मार्च से 10 दिसंबर 2026 तक खनन पट्टा कागजों में हुआ है जो समयावधि 9 माह दर्शाई गई है। जबकि लीज 6 माह होती है या तो 5 वर्ष के लिए।

दुरेड़ी के उक्त खंड को पूर्व तिंदवारी विधायक दलजीत सिंह का भांजा जितेंद्र सिंह संचालन करा रहा है। यहां भारी प्रतिबंधित पोकलैंड नदी में छन्ना लगाकर ग्राम मरौली के खंड 6 की तर्ज पर 3 मीटर से ज्यादा सीधे किसानों की भूमि से लाल मौरम उठा रहें है।

दुरेड़ी की महिला लेखपाल से कागज और गाटा नम्बर लेना मुश्किल

मंडल आयुक्त को दिए शिकायत पत्र में महिला किसान ऊषा निषाद ने आरोप लगाया कि दुरेड़ी की महिला लेखपाल किसानों को उनकी भूमि एवं मौरम खंड का रकबा व गाटा संख्या तक भय के चलते बतलाने से कतराती है। जब उन्होंने जानकारी करना चाही तो नहीं दी गई।

वहीं किसानों ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) मे लंबित याचिका 614/2025 मे जांच टीम के साथ जिस तरह से बांदा के खनिज अधिकारी, खान निरीक्षक गौरव गुप्ता, संबधित एसडीएम और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की महिला अधिकारी ने खेल किया है वह माननीय न्यायालय को भी अवगत है।

खनिज न्यास फाउंडेशन के बजट से लीज शर्तों अनुसार खनन समस्त प्रभावित गांवों में पर्यावरण संरक्षण को पौधरोपण एवं सड़क मरम्मत आदि कार्य तक बांदा में कहीं नहीं किए जाते है। जिसमें वनविभाग एवं खनिज विभाग की सीधी संलिप्तता है। यह धनराशि दूसरी सरकारी जरूरतों पर खर्च होती है।

अतः संयुक्त जांच टीम बनाकर इन खंडों की ड्रोन एवं सैटलाइट मैपिंग कराई जाए। तथा जिला सर्वेक्षण सूची एवं पुनर्भरण सर्वेक्षण की खामियों को दुरुस्त करते हुए बांदा में अवैध खनन की विभीषिका को रोकने का माकूल समाधान करने की मांग की है।

कार्यवाही न होने की सूरत में उन्होंने न्यायिक फोरम पर जाने की बात भी पुरजोर तरीके से लिखी है। ऐसे में देखना होगा कि मंडल आयुक्त सहित डीएम बांदा और प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र पर खान निदेशक माला श्रीवास्तव क्या कदम उठाती है।