चंदौली: 20 साल से बंद पड़ा सरकारी अस्पताल बदहाली का शिकार, अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप

उप्र के चंदौली जनपद के ग्राम पंचायत इकौनी में बना सरकारी अस्पताल पिछले करीब दो दशकों से चालू न होने के कारण अब बदहाली का शिकार हो चुका है।

चंदौली: 20 साल से बंद पड़ा सरकारी अस्पताल बदहाली का शिकार, अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
Published By- Diwaker Mishra

चंदौली से उमेश सिंह की रिपोर्ट

मुगलसराय/चंदौली/जनमत न्यूज़। उप्र के चंदौली जनपद के ग्राम पंचायत इकौनी में बना सरकारी अस्पताल पिछले करीब दो दशकों से चालू न होने के कारण अब बदहाली का शिकार हो चुका है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

19-20 साल से बंद पड़ा अस्पताल

भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष विपिन चंचल सिंह के अनुसार, यह अस्पताल करीब 19-20 साल पहले बनकर तैयार हो गया था, लेकिन आज तक इसे चालू नहीं किया गया। समय के साथ इसकी इमारत जर्जर हो चुकी है और रखरखाव के अभाव में हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। बताया गया कि इस अस्पताल को वर्ष 2006-07 में तत्कालीन ग्राम प्रधान राधेश्याम सिंह के कार्यकाल में स्वीकृति मिली थी।

अस्पताल बंद, लेकिन एंबुलेंस का संचालन जारी

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल भले ही बंद है, लेकिन यहां से 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन होता है। परिसर में करीब एक दर्जन एंबुलेंस खड़ी रहती हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि जब एंबुलेंस सेवा चल सकती है, तो अस्पताल क्यों नहीं।

ग्रामीणों को हो सकता है बड़ा फायदा

स्थानीय निवासी रमेश कुमार (ग्राम सभा कटारिया) का कहना है कि अगर यह अस्पताल चालू हो जाए तो आसपास के 30-40 गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। मरीजों को इलाज के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

सुरक्षा और देखरेख का अभाव

अस्पताल परिसर में कोई कर्मचारी तैनात नहीं है, जिससे सुरक्षा की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। देखरेख के अभाव में इमारत धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है।

अधिकारियों पर गंभीर आरोप

विपिन चंचल सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अन्य अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी मंशा सरकारी अस्पताल चलाने की नहीं है। उनका आरोप है कि निजी अस्पतालों को बढ़ावा देने के लिए इस सरकारी अस्पताल को नजरअंदाज किया जा रहा है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द इस अस्पताल को चालू करना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इकौनी का यह अस्पताल सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जहां करोड़ों की लागत से बनी इमारत उपयोग के अभाव में बर्बाद हो रही है और ग्रामीण आज भी बेहतर इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं।