कानपुर देहात: जायदाद की लालच में रिश्तों का क़त्ल, सगे भाइयों ने बहन को उतारा मौत के घाट

उप्र के कानपुर देहात के मूसानगर थाना क्षेत्र के मुर्तजा नगर मोहल्ले से एक ऐसी ख़ौफ़नाक और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत, रिश्तों और भाई-बहन के पवित्र बंधन को तार-तार कर दिया है।

कानपुर देहात: जायदाद की लालच में रिश्तों का क़त्ल, सगे भाइयों ने बहन को उतारा मौत के घाट
Published By- Diwaker Mishra

कानपुर देहात से अखिलेश त्रिवेदी की रिपोर्ट

कानपुर देहात/जनमत न्यूज़। उप्र के कानपुर देहात के मूसानगर थाना क्षेत्र के मुर्तजा नगर मोहल्ले से एक ऐसी ख़ौफ़नाक और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत, रिश्तों और भाई-बहन के पवित्र बंधन को तार-तार कर दिया है।

जायदाद की हवस, मकान के लालच और आपसी रंजिश ने इस कदर खूनी शक्ल अख्तियार कर ली कि सगे भाइयों ने अपनी ही बहन को मौत की नींद सुला दिया।

जानकारी के अनुसार रेशमा को उसके पिता द्वारा दिया गया मकान ही उसकी जान का दुश्मन बन गया। इस मकान को लेकर लंबे समय से रेशमा की भाइयों के साथ तनातनी, झगड़ा और अदावत चल रही थी, और यही अदावत आखिरकार क़त्ल में तब्दील हो गई।

दिल दहला देने वाली इस वारदात में भाइयों ने लोहे की रॉड से ऐसा बेरहम हमला किया गया कि बहन रेशमा का जिस्म खून से सराबोर हो गया और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

खून से लथपथ रेशमा का शव जब कमरे में पड़ा मिला तो इलाके में सनसनी, खौफ और अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों की मानें तो रेशमा पहले भी अपनी जान को खतरा बता चुकी थी और भाइयों पर गंभीर आरोप लगा चुकी थी, लेकिन उसकी फरियाद और डर को नजरअंदाज कर दिया गया, जो आज उसकी मौत की वजह बन गया।

वारदात के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है, हर कोई इस बेरहम क़त्ल को लेकर सिहर उठा है और लोग इस बात से सहमे हुए हैं कि आखिर जायदाद की हवस इंसान को कितना दरिंदा बना सकती है-मौके पर पहुंची।

पुलिस, सीओ और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से अहम साक्ष्य जुटाए हैं, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और अब इस सनसनीखेज क़त्ल की हर कड़ी को जोड़कर सच तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने टीम का गठन कर दिया है और आरोपियों की गिरफ्तार कर जल्द खुलासा करने का दम भर रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर कब तक जायदाद और लालच की आग में रिश्ते यूं ही जलते रहेंगे और कब तक अपने ही अपनों के खून के प्यासे बनते रहेंगे?