मिर्जापुर: भरत तिवारी मुठभेड़ के मामले में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने दिया ज्ञापन, की ये मांगें
बिहार के भोजपुर के भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ के मामले में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (आरएएम) के मिर्जापुर के जिलाध्यक्ष पंकज पांडेय के नेतृत्व में 12-15 पदाधिकारी व कार्यकर्ता जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट परिसर पर पहुंचकर प्रदर्शन के उपरांत राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन समय जिलाधिकारी मिर्जापुर को दिया।
मिर्जापुर से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
मिर्जापुर/जनमत न्यूज़। बिहार के भोजपुर के भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ के मामले में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (आरएएम) के मिर्जापुर के जिलाध्यक्ष पंकज पांडेय के नेतृत्व में 12-15 पदाधिकारी व कार्यकर्ता जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट परिसर पर पहुंचकर प्रदर्शन के उपरांत राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन समय जिलाधिकारी मिर्जापुर को दिया।
ज्ञापन में की गई ये मांगें
(1) भरत तिवारी की मृत्यु के संपूर्ण प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध न्यायिक जांच कराई जाए।
(2) जांच पूर्ण होने तक घटना में सम्मिलित सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
(3) यदि जांच में फर्जी मुठभेड़ अथवा अवैध बल प्रयोग सिद्ध होता है, तो दोषी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 (हत्या), धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 191 (साध्य नष्ट करना) तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
(4) पीड़ित परिवार को कम से कम ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
(5)पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
6. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की निगरानी में मामले की जांच कराई जाए।
(7). मुठभेड़ की संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यदि भरत तिवारी बाढ़ एवं कटान पीड़ितों की समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे थे, तो उनकी उठाई गई समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
(8)पुलिस सुधार आयोग का गठन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी नागरिक के साथ इस प्रकार की घटना न हो तथा प्रत्येक मुठभेड़ की अनिवार्य न्यायिक जांच कराई जाए।
(9)राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा सरकार से मांग करता है कि इस प्रकरण को "दुर्लभतम गंभीरता" का मामला मानते हुए दोषियों के विरुद्ध त्वरित न्यायालय में सुनवाई कराकर उन्हें कठोरतम दंड दिलाया जाए।
(10)यदि किसी अधिकारी द्वारा घटना के साक्ष्य मिटाने, तथ्यों को छिपाने अथवा झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया हो, तो उसके विरुद्ध भी पृथक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
(11) राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा यह मांग करता है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के संरक्षण एवं विधि के शासन की प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु दोषियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण न दिया जाए तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने हेतु प्रभावी कदम उठाने का कष्ट करेंगी।


