मुजफ्फरनगर: कलयुग में संस्कारों की मिसाल बनी बहू, सास-ससुर को कांवड़ यात्रा में पैदल ले जाकर जीता सबका दिल
कई जगह ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां वृद्ध माता-पिता या सास-ससुर को सम्मान और दो वक्त का भोजन तक नसीब नहीं हो पाता। ऐसे दौर में मुजफ्फरनगर से सामने आई एक बहू की सेवा और समर्पण की मिसाल लोगों के दिलों को छू रही है।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। आज के समय में अक्सर परिवारों के टूटते रिश्तों और बुजुर्गों की उपेक्षा की खबरें सुनने को मिलती हैं। कई जगह ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां वृद्ध माता-पिता या सास-ससुर को सम्मान और दो वक्त का भोजन तक नसीब नहीं हो पाता। ऐसे दौर में मुजफ्फरनगर से सामने आई एक बहू की सेवा और समर्पण की मिसाल लोगों के दिलों को छू रही है।
जनपद की एक बहू अपने वृद्ध सास और ससुर को कांवड़ यात्रा के दौरान बांकी (कांवड़ ढोने वाली लकड़ी की संरचना) में बैठाकर पैदल तीर्थ यात्रा करा रही है। रास्ते भर वह उनके आराम, भोजन और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखती नजर आई। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और हर किसी की जुबान पर बहू की प्रशंसा सुनाई दी।
वृद्ध सास-ससुर ने भावुक होकर कहा कि उन्हें अपनी बहू के रूप में भगवान महाकाल का आशीर्वाद मिला है। उनका कहना था कि आज जब कई बुजुर्ग अपने ही परिवार में उपेक्षा का दर्द झेल रहे हैं, तब उनकी बहू उन्हें माता-पिता का सम्मान देकर तीर्थ यात्रा करा रही है।
उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। रास्ते में श्रद्धालुओं ने भी बहू की सेवा भावना को देखकर उसकी सराहना की।
लोगों का कहना था कि यही भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की असली पहचान है, जहां माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है।
यह प्रेरणादायक दृश्य समाज को यह संदेश देता है कि रिश्तों की असली मजबूती धन-दौलत से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, सेवा और संस्कारों से होती है। ऐसी बहुएं न केवल अपने परिवार का गौरव बढ़ाती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती हैं।
आज यह बहू सिर्फ अपने सास-ससुर को तीर्थ यात्रा नहीं करा रही, बल्कि अपने व्यवहार से मानवता, संस्कार और परिवार के महत्व का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।


