एटा: पिता की इच्छा पूरी करने कंधों पर उठाई विशेष कांवड़, डीएम-एसएसपी ने की सराहना

श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा के बीच उप्र के एटा जनपद में एक ऐसा भावुक और प्रेरणा दायक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

एटा: पिता की इच्छा पूरी करने कंधों पर उठाई विशेष कांवड़, डीएम-एसएसपी ने की सराहना
Published By- Diwaker Mishra

एटा से नंद कुमार की रिपोर्ट

एटा/जनमत न्यूज़। श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा के बीच उप्र के एटा जनपद में एक ऐसा भावुक और प्रेरणा दायक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

आगरा जनपद के एत्मादपुर क्षेत्र के गांव मदरा (डा. नगला सबल) निवासी वृद्ध गोदन सिंह की शिवधाम जाकर जलाभिषेक करने की इच्छा को उनके चार पुत्रों ने अपने कंधों पर उठाकर साकार किया।

रतीभानपुर से भैसूली होते हुए जलेसर मार्ग पर भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी अरविन्द सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इला मारन की नजर विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ पर पड़ी, जिसमें वृद्ध गोदन सिंह बैठे हुए थे।

उनके चारों पुत्र-जयप्रकाश, किशन, टिंकू और बंटी-बारी-बारी से कांवड़ को अपने कंधों पर उठाकर शिव मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। इस भावुक दृश्य को देखकर डीएम और एसएसपी ने यात्रा कुछ देर के लिए रुकवाकर परिवार से मुलाकात की।

दोनों अधिकारियों ने पुत्रों की सेवा-भावना की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने कहा कि आज के समय में माता-पिता के प्रति ऐसा समर्पण दुर्लभ है। उन्होंने चारों भाइयों को "आधुनिक युग का श्रवण कुमार" बताते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा ही सच्चे अर्थों में ईश्वर की सेवा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है और उनकी सेवा प्रत्येक संतान का सबसे बड़ा धर्म है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इला मारन ने भी चारों भाइयों के संस्कार, समर्पण और सेवा-भाव की प्रशंसा करते हुए उनके सुरक्षित एवं मंगलमय कांवड़ यात्रा की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति व परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आया यह दृश्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। लोगों ने चारों भाइयों की सेवा-भावना की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों का जीवंत उदाहरण बताया।