बांदा में सिपाही पर युवती के गंभीर आरोप: शादी का झांसा देकर शोषण का केस दर्ज, जांच शुरू
सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर श्रीमती मेविस टाक ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विवेचना जारी है।
बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट —
बांदा/जनमत न्यूज। जनपद में एक पुलिसकर्मी पर युवती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। थाना कालिंजर क्षेत्र की रहने वाली एक युवती ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर सिपाही पवन कनौजिया पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और आर्थिक ठगी के आरोप लगाए हैं।
पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2021 में कालिंजर थाने में तैनात रहे सिपाही का उसके घर आना-जाना शुरू हुआ, जिससे दोनों के बीच पहचान और नजदीकियां बढ़ीं। आरोप है कि सिपाही ने शादी का भरोसा देकर वर्ष 2023 तक उसके साथ संबंध बनाए। इस दौरान कार खरीदने के नाम पर लगभग दो लाख रुपये नकद और करीब डेढ़ लाख रुपये के आभूषण भी ले लिए, जिन्हें अब तक वापस नहीं किया गया।
युवती ने यह भी आरोप लगाया कि सिपाही का तबादला पुलिस लाइन बांदा और बाद में हमीरपुर होने के बावजूद वह उसे शादी का झांसा देकर बांदा बुलाता रहा और वन विभाग रोड के पास किराए के मकान में साथ रखकर संबंध बनाता रहा। जब पीड़िता ने विवाह का दबाव बनाया, तो उसे कथित रूप से फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर इंकार कर दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लिया है। सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर श्रीमती मेविस टाक ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विवेचना जारी है। साथ ही आरोपी सिपाही के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी संकेत दिए गए हैं।
यह मामला एक बार फिर कानून और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में ‘सहमति’ और ‘शादी के झांसे’ के बीच की जटिल रेखा को सामने लाता है। न्यायालयों के विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी महिला को विवाह का झूठा आश्वासन देकर संबंध बनाए जाते हैं, तो यह धोखाधड़ी और दुष्कर्म की श्रेणी में आ सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच में जुटी है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने खाकी की छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं, ऐसे में निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच बेहद जरूरी मानी जा रही है।

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