उरई जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बवाल, बीजेपी नेता समेत कई लोगों पर डॉक्टरों से अभद्रता का आरोप

उप्र के उरई जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क पर हुए पैसे के लेन-देन के विवाद में घायल युवकों का मेडिकल कराने पहुंचे लोगों और अस्पताल कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।

उरई जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बवाल, बीजेपी नेता समेत कई लोगों पर डॉक्टरों से अभद्रता का आरोप
Published By- Diwaker Mishra

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के उरई जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क पर हुए पैसे के लेन-देन के विवाद में घायल युवकों का मेडिकल कराने पहुंचे लोगों और अस्पताल कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।

मामले में बीजेपी नेता शक्ति गहोई और उनके साथ मौजूद कुछ लोगों पर डॉक्टरों व कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करने तथा अस्पताल का मेडिकल रजिस्टर फाड़ने के आरोप लगे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मेडिकल परीक्षण और रेफर लिखने को लेकर इमरजेंसी वार्ड में काफी देर तक हंगामा होता रहा। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों पर मेडिकल रिपोर्ट अपनी मांग के अनुसार तैयार करने का दबाव बनाया गया। विरोध होने पर स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

घटना के दौरान इमरजेंसी में मौजूद कर्मचारियों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।

ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. अनुपम मिश्रा ने घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही उरई कोतवाली पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।

पूर्व जिला कोषाध्यक्ष शक्ति गहोई ने कोतवाली से लेकर जिला अस्पताल में काफी हंगामा किया पुलिस को धमकाते नजर आ रहे है। वैसे लोग भाजपा की एक संस्कारी पार्टी मानते है लेकिन ऐसे लोग ही भाजपा को बदनाम करने का तानाबाना बुन रहे है।

पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों में नाराजगी का माहौल है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में ड्यूटी के दौरान भी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।