केन नदी में अवैध खनन के आरोप, सूचना बोर्ड बिना ही शुरू हुआ मौरम उत्खनन

खदान क्षेत्र में अभी तक किसी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जबकि खनन कार्य के लिए निर्धारित नियमों के तहत खदान से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना आवश्यक होता है। आरोप है कि बिना रॉयल्टी के कहीं और से एमएम-11 लेकर केन नदी में अवैध खनन किया जा रहा है।

केन नदी में अवैध खनन के आरोप, सूचना बोर्ड बिना ही शुरू हुआ मौरम उत्खनन
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट —

बांदा/जनमत न्यूज। Banda जिले के पैलानी तहसील अंतर्गत ग्राम सांडी क्षेत्र में केन नदी में अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि खंड संख्या 60 में मौरम खनन का कार्य बिना आवश्यक सूचना बोर्ड लगाए ही शुरू कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार खदान क्षेत्र में अभी तक किसी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जबकि खनन कार्य के लिए निर्धारित नियमों के तहत खदान से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना आवश्यक होता है। आरोप है कि बिना रॉयल्टी के कहीं और से एमएम-11 लेकर केन नदी में अवैध खनन किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह खदान किसी सिंह नामक व्यक्ति के नाम आवंटित बताई जा रही है और 9 मार्च से यहां खनन कार्य शुरू हुआ है। खनन शुरू होते ही क्षेत्र में पोकलैंड मशीनें उतार दी गईं और मौरम निकासी का काम तेजी से चल रहा है।

स्थानीय सूत्रों का यह भी कहना है कि इस पूरे मामले में हमीरपुर क्षेत्र से जुड़े एक पूर्व भाजपा विधायक का भी परोक्ष रूप से नाम सामने आ रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस कारण क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिला खान अधिकारी Raj Ranjan को शासन स्तर से प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने की भी चर्चा है। बताया जाता है कि खान निदेशक द्वारा उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसके बावजूद जिले के अन्य मौरम खंडों में भी खनन व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

जानकारी के अनुसार सांडी खंड संख्या 60 का पट्टा छह माह के लिए आवंटित किया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों और मौरम कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो इससे पर्यावरण और नदी तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

क्षेत्र में उठ रहे सवालों के बीच लोगों का कहना है कि बुंदेलखंड की प्राकृतिक संपदा के दोहन को लेकर समय-समय पर आवाज उठती रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग की है।