भदोही: तालाब की जमीन पर कब्ज़ा कर हो रही है खेती, सामने आई प्रशासन की मिलीभगत
सरकार चाहे जितना भी कदम उठा ले सरकारी संपत्तियों को खाली करने के लिए लेकिन सरकारी नौकरशाह इन संपत्तियों की स्थिति बदलने में जरा भी देर नहीं करते।
भदोही से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
भदोही/जनमत न्यूज़। सरकार चाहे जितना भी कदम उठा ले सरकारी संपत्तियों को खाली करने के लिए लेकिन सरकारी नौकरशाह इन संपत्तियों की स्थिति बदलने में जरा भी देर नहीं करते। नोटों के बंडल के आगे तालाब की भी नवइयत बदलने में देर नहीं करते।
हम बात कर रहे हैं उप्र के भदोही जिले के औराई तहसील के तिउरी ग्राम सभा की जहां 5 से 6 विघे के तालाब पर हो रही सब्जियों की खेती। और मजे की बात खेती हो क्यों नहीं जमीन की नवईयत बदलकर इसे बैनामा कर दिया गया है।
जबकि सरकार का निर्देश है कि तालाब चारागाह इत्यादी की जमीन में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता क्योंकि इसके लिए सख्त आदेश भी है कि इन तालाबों को खाली कराया जाए जिस पर लोगों का कब्जा है और अतिक्रमण किया गया है।
ऐसी स्थिति में औराई तहसील के मौजा तिउरी का 429 मि जो की 41 व 45 की नकल में तालाब दर्ज हैऔर ऐसी स्थिति मेंउसे जमीन की नवईयत बदलकर उसे बैनामा भी कर दिया गया हैइस मामले का खुलासा तब हुआ जब आरटीआई के माध्यम से इसकी जानकारी मांगी गई तो राजस्व कर्मी ने बाकायदा इस पर अपनी रिपोर्ट भी प्रेषित की।
जिसकी रिपोर्ट भी हम आपको दिखाते हैं और साथ ही साथ आरटीआई मांगने वालेका बयान भी और तालाब जो था अब वह बाउंड्री वॉल में तब्दील होकर के बाकायदा लहलहाती फैसले भी तैयार तालाब में पंपिंग सेट भी लगा है। जिस तालाब के स्थान पर अब खेत की सिंचाई होती है।
जो कभी तालाब था वह खेत में तब्दील हो चुका है। सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले इन अधिकारियों पर कार्यवाही कब होगी। जो जमीन की नवियत बदलने में जरा भी देर नहीं करते उसके बाद बारी आती है इन संपत्तियों की देखभाल करने के लिए राजस्व कर्मियों की।
जिन्हें लेखपाल कहा जाता है कि वह ग्राम सभा की संपत्तियों को खाली रखने का झ्हे दायित्व होता है लेकिन उनकी जेब कर गर्म करने परया उन सरकारी संपत्तियों कोप्राइवेट संपत्ति में तब्दील करने में जरा भी देर नहीं करते। आखिर न्याय कैसे होगा।
जनता चक्की के दो परतों में पिसती रहेगी। एक तरफ तो सरकारी महकमे की लूट तो दूसरी तरफ अदालतों का चक्कर इस मामले में जानकारी मांगने वाले के खिलाफ दबाव भी आया लेकिन जानकारी मांगने वाले ने बताया कि इस मामले को कमिश्नर से लेकर मुख्यमंत्री तक चिट्ठी लिखी गई लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
तो आखिर सरकार क्या जुमले बाजी की सरकार बनकर रह गई है या फिर जनता के साथ न्याय भी होगा। जवकी ऐसे ही मामले को लेकर कमला देवी वनाम हिन्छलाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी दिया जो की मे हिन्छलाल बनाम कमला देवी रिट संख्या26572 है जिस फैसले पर गाइड लाइन बनाई गयी लेकिन इसका अनुपालन नही कराया जा रहा जिससे जनता त्रस्त हो चुकी है।

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