गजरौला थाने के पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने व मारपीट का आरोप, जांच की मांग तेज

प्रधान ने रिश्वत देने से इनकार किया तो उनके साथ कथित रूप से गाली-गलौज और बदसलूकी की गई। इतना ही नहीं, उन्हें थाने के अंदर एक कमरे में बंद कर डंडों से मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है।

गजरौला थाने के पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने व मारपीट का आरोप, जांच की मांग तेज
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

पीलीभीत से प्रेमदेव पाठक की रिपोर्ट —

पीलीभीत/जनमत न्यूज। जनपद Pilibhit के Gajraula Police Station से पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। थानाध्यक्ष बृजवीर सिंह और दरोगा सुनील कुमार पर ग्राम प्रधान से कथित रूप से रिश्वत मांगने, मारपीट करने और एनकाउंटर की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार 21 मार्च 2026 को ग्राम पंचायत Mahua के प्रधान वीरबल एक पारिवारिक विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से गजरौला थाने पहुंचे थे। उनके साथ ग्राम Ajitpur Patpara निवासी रूपलाल भी मौजूद थे। आरोप है कि थाना प्रभारी बृजवीर सिंह, दरोगा सुनील कुमार तथा एक सिपाही द्वारा उनसे 40 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब प्रधान ने रिश्वत देने से इनकार किया तो उनके साथ कथित रूप से गाली-गलौज और बदसलूकी की गई। इतना ही नहीं, उन्हें थाने के अंदर एक कमरे में बंद कर डंडों से मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही उनके साथ आए व्यक्ति को डराकर सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराने और उन्हीं कागजों के आधार पर प्रधान के खिलाफ धारा 151 में कार्रवाई करने का भी आरोप लगाया गया है।

सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि शिकायत करने की स्थिति में एनकाउंटर कर देने की धमकी भी दी गई। इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोगों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

घटना को लेकर दलित समाज में भी आक्रोश देखा जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो प्रकरण को उच्च अधिकारियों, आयोग और न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

पीड़ित प्रधान वीरबल का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और इस अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि आम जनता के विश्वास से जुड़ा मुद्दा है।

इस मामले ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए तो इससे जनता का भरोसा मजबूत होगा।