उरई: मस्जिद गिराने के विरोध में वामपंथी मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना और विपक्षी नेताओं को नजरबंद किए जाने के विरोध में वामपंथी मोर्चा ने उप्र के उरई जनपद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट
उरई/जनमत न्यूज़। सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना और विपक्षी नेताओं को नजरबंद किए जाने के विरोध में वामपंथी मोर्चा ने उप्र के उरई जनपद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
मोर्चे ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून के शासन की अनदेखी की जा रही है। ज्ञापन में सहारनपुर की घटना को चिंताजनक बताया गया।
मोर्चे के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि प्रदेश में ‘जंगलराज’ जैसी स्थिति है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में जिस मस्जिद को गिराया गया, उसका निर्माण वर्ष 1911 में हुआ था। मोर्चे का दावा है कि प्रदेश सरकार को इस मस्जिद को गिराने का अधिकार नहीं था।
हालांकि, मस्जिद के निर्माण वर्ष, स्वामित्व और कार्रवाई के कानूनी आधार से संबंधित दस्तावेजों का विवरण उपलब्ध नहीं है। ज्ञापन में विपक्षी नेताओं को घरों में नजरबंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। मोर्चे ने इसे लेकर प्रदेश सरकार के रवैये पर आपत्ति जताई।
उसका आरोप है कि एक ओर मस्जिद गिराने जैसी कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के नेताओं को हाउस अरेस्ट किया जा रहा है। ज्ञापन में इन घटनाओं को प्रदेश में कानून के राज की स्थिति से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की गई।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मोर्चे ने अपनी आपत्तियां राज्यपाल तक पहुंचाईं। ज्ञापन का मुख्य जोर सहारनपुर की घटना, विपक्षी नेताओं की कथित नजरबंदी और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर रहा।
मस्जिद गिराने की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और उसका प्रशासनिक आधार क्या था, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। नजरबंदी के आरोपों पर भी आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
ज्ञापन सौंपने वालों में विजय सिंह राठौर, ग्रन्थ सिंह कुशवाह, सुधीर अवस्थी, देवेंद्र शुक्ला, देवेश चौरसिया, विनोद कुमार नगरिया, भारत सिंह जाटव और राम सिंह चौधरी सहित अन्य लोग शामिल रहे। इन लोगों ने मोर्चे की ओर से आपत्तियां दर्ज कराईं।




