वक्फ संपत्तियों, गौकशी और ‘वंदे मातरम’ मुद्दे पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सरकार को घेरा

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर भी सांसद बर्क ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समाज और कई अन्य लोग भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं, तो भाजपा शासित राज्यों में सख्ती से कानून लागू क्यों नहीं हो पाता।

वक्फ संपत्तियों, गौकशी और ‘वंदे मातरम’ मुद्दे पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सरकार को घेरा
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

संभल से रामब्रेस यादव की रिपोर्ट —

संभल/जनमत न्यूज। जियाउर्रहमान बर्क ने 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन निरस्त किए जाने के मामले में सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन प्रक्रिया और दस्तावेजी औपचारिकताओं को सही तरीके से समझ नहीं पाए, जिसके चलते कई रजिस्ट्रेशन रद्द हो गए। सांसद ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को रजिस्ट्रेशन की सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करना।

सपा सांसद ने कहा कि प्रभावित लोगों को दोबारा मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड, वक्फ ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट का रास्ता खुला हुआ है तथा जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर भी सांसद बर्क ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समाज और कई अन्य लोग भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं, तो भाजपा शासित राज्यों में सख्ती से कानून लागू क्यों नहीं हो पाता। उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है।

बर्क ने कहा कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी “फर्ज़” नहीं बल्कि “जायज़” है और दोनों में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्म किसी दूसरे धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं देता। सांसद ने कहा कि हिंदू समाज की भावनाओं को देखते हुए देश के कई मुसलमानों ने भी संवेदनशीलता दिखाई है और कई स्थानों पर गाय की कुर्बानी से दूरी बनाई है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी सांसद बर्क ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देशभक्ति किसी शब्द को जबरन बुलवाने से साबित नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के कर्म और देश के लिए दी गई कुर्बानी से तय होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान का सभी धर्मों के लोग सम्मान करते हैं, लेकिन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर संविधान सभा के समय भी कुछ आपत्तियां और मतभेद सामने आए थे।

सांसद ने कहा, “हमें ‘राष्ट्र’ शब्द से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गीत के कुछ ऐसे अल्फाज़ हैं जिनका हमारे मजहब से टकराव होता है।” उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और उसी अधिकार के तहत लोग अपनी आस्था के अनुसार निर्णय लेते हैं।

सपा सांसद ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस प्रकार के मुद्दे जनता के असली सवालों से ध्यान भटकाने के लिए उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत गाने से न बेरोजगारी समाप्त होगी और न ही महंगाई कम होगी। सरकार को शिक्षा, रोजगार, महंगाई, पेट्रोल-डीजल और गैस संकट जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने हिंदू समाज से भी अपील करते हुए कहा कि ऐसे विवादित मुद्दों से आगे बढ़कर देश की तरक्की और आम जनता की समस्याओं पर सोचने की जरूरत है। सांसद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में जनता के हित में काम करना चाहती है तो अंतरराष्ट्रीय हालातों के बीच टैक्स में राहत देकर लोगों को राहत पहुंचानी चाहिए।

अंत में जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि मुस्लिम समाज को बार-बार अपनी देशभक्ति साबित करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी देश को जरूरत पड़ी है, मुस्लिम समाज ने हर स्तर पर अपनी भागीदारी और कुर्बानी दी है।