सहारनपुर: महापौर ने राशन की दुकान का किया औचक निरीक्षण, जबरन बिक्री और राशन कटौती का भंडाफोड़

उप्र के सहारनपुर के महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह ने शहर की एक राशन दुकान 123 पर आज अचानक औचक निरीक्षण किया तो बड़ा घोटाला सामने आ गया।

सहारनपुर: महापौर ने राशन की दुकान का किया औचक निरीक्षण, जबरन बिक्री और राशन कटौती का भंडाफोड़
Published By- Diwaker Mishra

सहारनपुर से अनिल वर्मा की रिपोर्ट

सहारनपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के सहारनपुर के महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह ने शहर की एक राशन दुकान 123 पर आज अचानक औचक निरीक्षण किया तो बड़ा घोटाला सामने आ गया।

राशन कार्ड धारकों को सरकारी राशन देने के बदले जबरन सर्फ, साबुन और नमक खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था। साथ ही प्रत्येक यूनिट पर करीब एक किलो राशन की अवैध कटौती भी पकड़ी गई। मौके पर महापौर ने डिपो होल्डर की इस मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

उपभोक्ताओं ने शिकायत की राशन तभी मिलता है जब अतिरिक्त सामान खरीदा जाए। यह सिर्फ एक दुकान की बात नहीं, बल्कि शहर भर के कई डिपो होल्डर्स की यही रवैया बताया जा रहा है। गरीब और जरूरतमंद परिवार सरकारी योजना का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर यह अवैध धंधा बेखौफ कैसे चल रहा है? क्या सिर्फ़ डिपो होल्डर्स की मनमानी है या इसमें किसी बड़े स्तर पर हिस्सेदारी और संरक्षण है?

राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए महापौर के इस कदम की सराहना हो रही है, लेकिन लोगों की मांग है कि पूरे शहर के डिपो होल्डर्स की जांच हो और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की जाए।

महापौर डॉ। अजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि राशन कार्ड धारकों के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती और कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खाद्य एवं रसद विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी दुकानों का व्यापक निरीक्षण किया जाए और शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो।

आम नागरिकों से अपील की गई है कि ऐसी किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत दें।यह घटना सार्वजनिक वितरण प्रणाली  में व्याप्त अनियमितताओं को फिर से उजागर करती है।

सरकार की मुफ़्त या सब्सिडी वाले राशन योजना का मकसद गरीबों को राहत देना है, न कि बिचौलियों और डिपो होल्डर्स को फ़ायदा पहुंचाना।

सहारनपुर प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में दोषी डिपो होल्डर्स के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई हो और पूरे सिस्टम को दुरुस्त किया जाए, ताकि ऐसी शिकायतों को दोबारा न दोहराए जाएं।