संत रविदास का दर्शन सामाजिक पाखंड के विरुद्ध चेतना का उद्घोष: केपी सिंह

संत रविदास ने ऐसे दौर में समाज को जगाने का साहस किया, जब पूरी सामाजिक व्यवस्था पोंगापंथ और अंधविश्वास के शिकंजे में जकड़ी हुई थी। उस समय धार्मिक और सामाजिक आडंबर लोगों की सोच को कुंद कर रहे थे, लेकिन संत रविदास ने “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का संदेश देकर समाज को आत्मचिंतन और विवेक की राह दिखाई।

संत रविदास का दर्शन सामाजिक पाखंड के विरुद्ध चेतना का उद्घोष: केपी सिंह
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट —

उरई/जालौन/जनमत न्यूज। संत शिरोमणि रविदास का दर्शन प्रपंचों और सामाजिक आडंबरों के विरुद्ध संघर्ष का दर्शन है। उन्होंने उन परंपरागत बुराइयों पर निर्भीक होकर प्रहार किया, जिन्हें एक वर्ग द्वारा समाज को मानसिक गुलामी में जकड़े रखने के लिए थोपा गया था। यह विचार करमेर रोड, उरई स्थित रविदास विकास संस्थान में आयोजित संत शिरोमणि रविदास की 649वीं जयंती समारोह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार केपी सिंह ने व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता केपी सिंह ने कहा कि संत रविदास ने ऐसे दौर में समाज को जगाने का साहस किया, जब पूरी सामाजिक व्यवस्था पोंगापंथ और अंधविश्वास के शिकंजे में जकड़ी हुई थी। उस समय धार्मिक और सामाजिक आडंबर लोगों की सोच को कुंद कर रहे थे, लेकिन संत रविदास ने “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का संदेश देकर समाज को आत्मचिंतन और विवेक की राह दिखाई। उन्होंने कहा कि भक्ति और धर्म सत्ता का साधन नहीं हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज इन्हें सत्ता और वर्चस्व बनाए रखने का माध्यम बना लिया गया है। उन्होंने संविधान द्वारा प्रदत्त समता के अधिकारों की चर्चा करते हुए कहा कि कुछ वर्चस्ववादी शक्तियां अपनी श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

समारोह में प्रोफेसर आरपी सिंह ने संत रविदास द्वारा मूर्ति पूजा और पाखंड पर किए गए प्रहार को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रेरणादायक बताया। विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी ने संत रविदास को सामाजिक चेतना का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनका दर्शन आज भी समाज को नई दिशा देने में सक्षम है। वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी रामशरण जाटव ने कहा कि संत रविदास ने अपने विचारों से उस समय की जड़ सामाजिक व्यवस्था को झकझोर दिया था। वे चमत्कारों की नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने की बात करते थे। “कठौती में गंगा” का संदेश यही है कि यदि मन निर्मल है तो बाहरी आडंबरों का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य श्रीमती रमा निरंजन ने संत रविदास को सड़ी-गली सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध आम जनमानस को जागरूक करने वाला महान दार्शनिक बताया। उन्होंने कहा कि संत रविदास का चिंतन सामाजिक समानता और मानव गरिमा की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।

कार्यक्रम को बाबू रामाधीन अहिरवार, चौधरी श्याम सुंदर शैलेंद्र शिरोमणि, इंजीनियर के.के. भास्कर, मानिकचंद, एपी भारती, तुलसीराम खन्ना, पुनीत भारती, विजय सिंह निरंजन सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। समारोह की अध्यक्षता बलवान सिंह ने की, जबकि संचालन रामसनेही बाबूजी, अशोक कुमार सिंह और अरविंद कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर चौधरी जय करण सिंह खरुसा, कॉमरेड देवेंद्र शुक्ला, डॉ देवेंद्र कुमार, रामावतार सिंह गौतम, प्रेम कुमार आनंद, रमाई महिला सेवा संस्था से शालिनी बौद्ध, डॉ रेखा सिंह, एड अचला सिंह सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिलाएं मौजूद रहीं। सभी ने संत शिरोमणि रविदास, तथागत गौतम बुद्ध, बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर एवं अन्य सामाजिक महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।