लखनऊ से रजनीश छबि की रिपोर्ट —
लखनऊ/जनमत न्यूज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक ताकत उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में अब कृषि विकास का फोकस रकबे के विस्तार पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रदेश के लिए एक नई, आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ‘बीज नीति’ तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को प्रमाणित बीजों की कमी से मुक्त करना और संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले पाँच वर्षों के लिए बीज उत्पादन, गुणवत्ता और उपलब्धता से जुड़ा एक ठोस और व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया जाए, जिससे किसानों को समय पर बेहतर बीज उपलब्ध हो सकें।
बीज नीति पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी श्रृंखला में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों तक पहुँचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और मानकों के अनुरूप हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस विषय में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), उपकार तथा निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे बीज अनुसंधान, नवाचार और नई किस्मों के रिलीज़ की प्रक्रिया में तेजी आएगी और किसानों को उन्नत बीज शीघ्र उपलब्ध हो सकेंगे।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता हेतु विशेष रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। इसी क्रम में उन्होंने अगले पाँच वर्षों में प्रदेश में कम से कम पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त एकीकृत केंद्र होंगे। साथ ही टिशू कल्चर लैब्स और प्रमाणित नर्सरी नेटवर्क को भी सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रभावी प्रसार के बीच मजबूत समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप प्रत्येक जोन में एक कृषि विज्ञान केंद्र को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रगतिशील किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रमों से जोड़कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
कृषि में ऊर्जा दक्षता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकाधिक ट्यूबवेलों के सौर ऊर्जीकरण को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की सिंचाई लागत कम होगी और कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय उद्योग, रोजगार और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।