गन्ना के साथ तिलहन–दलहन अंतःफसली खेती से किसानों की आय होगी बहुगुणित: मुख्यमंत्री योगी

कृषि क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर अपनाना है।

गन्ना के साथ तिलहन–दलहन अंतःफसली खेती से किसानों की आय होगी बहुगुणित: मुख्यमंत्री योगी
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

लखनऊ से रजनीश छबि की रिपोर्ट —

लखनऊ/जनमत न्यूज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर अपनाना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहुगुणित करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय प्राप्त होती है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि कृषि जोखिम भी कम होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार संभव नहीं है, इसलिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता प्रति इकाई क्षेत्रफल अधिक उत्पादन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से गन्ना आधारित अंतःफसली खेती प्रदेश के कृषि भविष्य का नया और टिकाऊ मॉडल बन सकती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र तथा 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी क्षेत्र शामिल है। उन्होंने कहा कि इस विशाल क्षेत्र में तिलहन और दलहन फसलों की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश को तिलहन–दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस योजना का क्रियान्वयन कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) की सिफारिशों के अनुरूप रबी मौसम में सरसों और मसूर तथा जायद मौसम में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गन्ने की पैदावार को प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता है।

मुख्यमंत्री ने इस योजना के लिए वर्षवार स्पष्ट रोडमैप तैयार करने और सहायता एवं अनुदान की रूपरेखा तय करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि अंतःफसलों से होने वाला अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल पर निर्भरता कम होगी, जिससे कृषि अधिक स्थिर, सुरक्षित और टिकाऊ बनेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस योजना को केवल गन्ना किसानों तक सीमित न रखते हुए प्रदेश के समग्र कृषि परिदृश्य में परिवर्तन के एक प्रभावी माध्यम के रूप में लागू किया जाए।